दुनिया भर में बुद्ध धम्म की ओर रुझान बढ़ा, इसके संरक्षण और प्रसार की भारत पर विशेष जिम्मेदारी: किरेन रिजिजू

**EDS: THIRD PARTY IMAGE** In this image posted on Jan. 24, 2026, Union Minister of Minority Affairs Kiren Rijiju during a meeting with a delegation of senior representatives from the Government of South Korea, in New Delhi. (@KirenRijiju/X via PTI Photo)(PTI01_24_2026_000530B)

नई दिल्ली, 25 जनवरी (पीटीआई): केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने शनिवार को कहा कि जैसे-जैसे दुनिया भर में लोग बुद्ध धम्म की ओर आकर्षित हो रहे हैं, भारत पर करुणा, अहिंसा, सद्भाव और सह-अस्तित्व के सिद्धांतों को संरक्षित करने, साझा करने और अपने जीवन में अपनाने की विशेष जिम्मेदारी है।

यहां भारत मंडपम में आयोजित ग्लोबल बौद्ध शिखर सम्मेलन के दूसरे संस्करण को संबोधित करते हुए संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने बौद्ध धर्म की समावेशी और सार्वभौमिक अपील को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्म का संदेश केवल बौद्धों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे मानव समाज के लिए प्रासंगिक है।

विभिन्न देशों से आए प्रख्यात भिक्षुओं, विद्वानों और बौद्ध संगठनों के सदस्यों को संबोधित करते हुए केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बौद्ध संवाद को बढ़ावा देने में भारत के “वैश्विक नेतृत्व” को रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने बौद्ध भिक्षुओं, गुरुओं, विद्वानों और चिंतकों के लिए एक अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान करने की “सक्रिय जिम्मेदारी” निभाई है, जो शांति और सद्भाव के प्रति भारत की स्थायी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

संस्कृति मंत्रालय के एक बयान में कहा गया कि 24 से 25 जनवरी तक आयोजित यह शिखर सम्मेलन बुद्ध की भूमि के रूप में भारत की भूमिका और सामूहिक ज्ञान, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और पारस्परिक समझ के “वैश्विक प्रकाश स्तंभ” के रूप में उसकी पहचान को दोहराता है।

रिजिजू ने कहा कि वैश्विक स्तर पर जैसे-जैसे लोग धम्म की ओर बढ़ रहे हैं, भारत पर करुणा, अहिंसा, सद्भाव और सह-अस्तित्व के सिद्धांतों को संरक्षित करने, साझा करने और उन्हें जीने की विशेष जिम्मेदारी है।

शिखर सम्मेलन की थीम है — ‘सामूहिक ज्ञान, एकजुट स्वर और पारस्परिक सह-अस्तित्व’।

शेखावत ने आगे कहा कि ज्ञान भारतम् मिशन के तहत भारत सरकार प्राचीन पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण की दुनिया की सबसे बड़ी पहलों में से एक पर काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक प्रयास भारत की सभ्यतागत और आध्यात्मिक धरोहर को संरक्षित करने और विश्व के साथ साझा करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

शेखावत ने प्रतिनिधियों और नागरिकों से दक्षिण दिल्ली के राय पिथौरा सांस्कृतिक केंद्र में प्रदर्शित अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी — “द लाइट एंड द लोटस: द अवशेष ऑफ द अवेकन्ड वन” — को देखने और भगवान बुद्ध को श्रद्धांजलि अर्पित करने का आग्रह किया।

इस प्रदर्शनी में बुद्ध से जुड़े ऐतिहासिक पिपरहवा अवशेष प्रदर्शित किए गए हैं, जिनकी खुदाई 19वीं सदी के अंत में की गई थी। हाल ही में स्वदेश लौटाए गए पिपरहवा रत्न भी इसमें शामिल हैं।

उन्होंने पिपरहवा अवशेषों को भारत की प्राचीन सभ्यता और कालातीत आध्यात्मिक विरासत के जीवंत प्रतीक बताया।

दो दिवसीय यह शिखर सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (आईबीसी) द्वारा संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।