
नागपुर, 18 जनवरी (पीटीआई) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को यहां कहा कि युद्ध अब बेहद जटिल हो गए हैं और केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहे हैं। ऊर्जा, व्यापार, शुल्क (टैरिफ), आपूर्ति शृंखला, प्रौद्योगिकी और सूचना भी अब संघर्ष के नए आयाम बन चुके हैं।
यहां सोलर इंडस्ट्रीज़ में मध्यम कैलिबर गोला-बारूद निर्माण इकाई के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि एक समय था जब रक्षा उत्पादन केवल सार्वजनिक क्षेत्र तक सीमित था और निजी क्षेत्र की भागीदारी के बारे में कोई सोचता तक नहीं था।
उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र में क्षमता और संभावनाएं तो थीं, लेकिन उसकी भागीदारी उस स्तर पर नहीं हो पाई, जितनी होनी चाहिए थी। ‘आत्मनिर्भरता’ की दिशा में कदम बढ़ाते समय निजी क्षेत्र की रक्षा उत्पादन में भूमिका को लेकर कई चुनौतियां और आशंकाएं थीं, लेकिन वर्तमान सरकार ने नीतियों में बदलाव और प्रक्रियाओं को सरल बनाकर इस क्षेत्र को खोला, क्योंकि उसे निजी क्षेत्र की क्षमता पर पूरा भरोसा था।
सिंह ने कहा, “इसका परिणाम बेहतर गुणवत्ता, समय पर आपूर्ति, उत्पादकता और डिलीवरी में सुधार के रूप में सामने आ रहा है। हमारा रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र काफी मजबूत हुआ है। निजी रक्षा क्षेत्र में वैज्ञानिक सोच और प्रौद्योगिकी आधारित दृष्टिकोण का विकास सराहनीय है।”
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) के मामले में अब निजी क्षेत्र सार्वजनिक क्षेत्र से आगे निकल चुका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत तेजी से एक प्रमुख हथियार निर्यातक देश बनने की ओर बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि गोला-बारूद की आपूर्ति में कमी महसूस की जा रही थी, लेकिन सरकार ने इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता सुनिश्चित की है। साथ ही उन्होंने सोलर समूह की सराहना की, जिसने पिनाका मिसाइलों और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में इस्तेमाल किए गए नागास्त्र ड्रोन जैसे रक्षा उत्पादन किए हैं।
रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार की महत्वाकांक्षा है कि भारत गोला-बारूद उत्पादन का वैश्विक केंद्र बने। “युद्ध लगातार अधिक जटिल और तीव्र होते जा रहे हैं। ऐसे में युद्ध की तैयारी भी युद्धस्तर पर होनी चाहिए। युद्ध का स्वरूप बहुत तेजी से बदल रहा है और नए तरीके सामने आ रहे हैं, जो पारंपरिक युद्ध में नहीं थे,” उन्होंने कहा।
उन्होंने आगे कहा, “अब युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनके प्रभाव सीधे आम जनता पर पड़ते हैं। ऊर्जा, व्यापार, शुल्क, आपूर्ति शृंखला, प्रौद्योगिकी और सूचना संघर्ष के नए आयाम बन गए हैं।”
इन बदलावों को देखते हुए उन्होंने कहा कि सीमाओं पर सतर्कता, हथियारों, हार्डवेयर और रक्षा औद्योगिक विनिर्माण पर देश का ध्यान और अधिक बढ़ गया है। “युद्ध चाहे किसी भी रूप में हो, समय की मांग है कि हमारे पास मजबूत रक्षा औद्योगिक आधार, अनुसंधान एवं विकास और निजी क्षेत्र द्वारा उत्पादन हो। सरकार चाहती है कि रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में निजी क्षेत्र का योगदान कम से कम 50 प्रतिशत हो,” उन्होंने कहा।
सिंह ने जानकारी दी कि घरेलू रक्षा उत्पादन 2014 में 46,000 करोड़ रुपये से बढ़कर अब 1.50 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है, जिसमें निजी क्षेत्र का योगदान 30,000 करोड़ रुपये का है। उन्होंने बताया कि 10 साल पहले रक्षा निर्यात मात्र 1,000 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 25,000 करोड़ रुपये हो गया है, जबकि सरकार का लक्ष्य 2029-30 तक इसे 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का है।
