मुंबई, 21 नवम्बर (PTI) नासिक के तपोवन क्षेत्र में 2027 कुंभ मेले की तैयारी के तहत साधु ग्राम विकसित करने के लिए 1,700 से अधिक पेड़ों को हटाने के प्रस्ताव ने स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण समूहों के बीच कड़ा विरोध पैदा कर दिया है। लगभग 1,670 पेड़ों को पीले रंग से चिह्नित किए जाने के बाद 400 से अधिक आपत्तियाँ दर्ज की गई हैं, जिनमें से लगभग 40 प्रतिशत पेड़ों की कटाई का प्रस्ताव है।
महाराष्ट्र के मंत्री गिरीश महाजन ने प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की और आश्वासन दिया कि जहां संभव होगा, पेड़ों को स्थानांतरित (ट्रांसप्लांट) करने और नई वृक्षारोपण से क्षतिपूर्ति करने के प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि कुंभ मेले में देश और विदेश से संतों व श्रद्धालुओं की भारी भीड़ आएगी, जिसके लिए बड़े पैमाने की तैयारियाँ आवश्यक हैं। उनके अनुसार, काटे जाने वाले हर पेड़ के बदले दस नए पेड़ लगाए जाएंगे।
महाजन ने कहा, “सिंहस्थ कुंभ मेले के लिए नासिक को दुनिया भर से आने वाले हजारों संतों और महंतों की मेजबानी करनी होगी। 1,800 से अधिक पेड़ों को काटना पड़ सकता है, जिसका प्रकृति प्रेमियों ने विरोध किया है।” उन्होंने कहा कि जहाँ संभव होगा, पेड़ों को बचाने के लिए ट्रांसप्लांटिंग की जाएगी।
मंत्री ने जहाँ बुनियादी ढांचे और पर्यावरण के बीच संतुलन की आवश्यकता पर जोर दिया, वहीं कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे कुंभ मेले के खिलाफ नहीं हैं बल्कि पुराने, बड़े पेड़ों की कटाई के खिलाफ हैं। कपिला नदी संरक्षण समिति के योगेश बर्वे ने कहा कि इससे पहले नासिक में आयोजित कुंभ मेलों के दौरान इन परिपक्व पेड़ों को काटने की जरूरत नहीं पड़ी थी। उन्होंने बताया कि इस बार सौ साल से अधिक पुराने बरगद, पीपल, इमली और उंबर के पेड़ों तक को चिह्नित कर दिया गया है और चेतावनी दी कि इन्हें काटने पर विरोध तेज होगा।
नासिक महानगरपालिका की अतिरिक्त आयुक्त करिश्मा नायर ने कहा कि केवल वे पेड़ हटाए जाएंगे जो छोटे हैं और निर्माण कार्य से प्रभावित हो रहे हैं। दस वर्ष से कम आयु के पेड़ों की कटाई की जा सकती है और बराबर संख्या में पौधे लगाए जाएंगे, जबकि पुराने पेड़ों को संरक्षित किया जाएगा।
साधु ग्राम 1,200 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है, जहाँ मेले के दौरान वैष्णव संप्रदाय के संतों को ठहराया जाएगा। आधिकारिक ध्वज-रोहण समारोह 31 अक्टूबर 2026 को होगा। राष्ट्रसंत जनार्दन स्वामी आश्रम से बटुक हनुमान मंदिर तक किए गए सर्वे में बबूल के पेड़ों और झाड़ियों की बड़ी संख्या पाई गई। नासिक महानगरपालिका का कहना है कि बुनियादी ढांचे के विकास के लिए सफाई आवश्यक है। PTI
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