
नई दिल्ली, 2 फरवरी (पीटीआई) आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने सोमवार को कहा कि विभिन्न राज्यों में चल रहे निर्वाचन नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं और उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को “घोटाला” करार दिया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संसद के संयुक्त सत्र में दिए गए अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते हुए सिंह ने सत्तारूढ़ दल पर कई मुद्दों पर निशाना साधा और उस पर नफरत की राजनीति करने तथा पिछड़े वर्गों के कल्याण के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया।
सिंह ने कहा कि एसआईआर के नाम पर करोड़ों मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में एसआईआर के बाद तैयार की गई सूची से लगभग 4.5 करोड़ मतदाता गायब हैं। हालांकि, एसआईआर के बाद राज्य की अंतिम मतदाता सूची अभी प्रकाशित नहीं हुई है।
दिल्ली से राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा, “यह (एसआईआर) एक बहुत बड़ा धोखा है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर के नोटिस नेताजी सुभाष चंद्र बोस के परिजनों, नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन और पूर्व नौसेना कर्मियों के परिवारों तक को भेजे जा रहे हैं।
उन्होंने कहा, “यह एसआईआर नहीं है, यह चुनावी घोटाला है।”
विदेश नीति के मुद्दे पर सिंह ने बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्या पर सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाया।
उन्होंने कहा, “वे सामने आकर कोई स्पष्टीकरण नहीं दे रहे हैं।”
आप नेता ने दोषी यौन तस्कर जेफ्री एपस्टीन से जुड़े जांच दस्तावेजों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदर्भ का भी उल्लेख किया और इस पर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा।
उन्होंने कहा, “अगर कोई आरोप है तो उसका जवाब दिया जाना चाहिए।”
उनकी टिप्पणियों पर सत्ता पक्ष की ओर से तुरंत आपत्ति जताई गई।
भाजपा के वरिष्ठ नेता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि संसद में एक विकृत और दोषी अपराधी का उल्लेख करना विकृत मानसिकता का प्रतीक है।
उन्होंने कहा, “ऐसा कहना (एपस्टीन फाइलों का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री से जोड़ना) बेहद निंदनीय है और यह विकृत सोच का प्रतीक है।”
सभापति की कुर्सी पर बैठे दिनेश शर्मा ने आप नेता से कहा कि वे तथ्यों के बिना किसी बात का उल्लेख न करें।
विदेश मंत्रालय ने शनिवार को एपस्टीन फाइलों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदर्भ को सख्ती से खारिज करते हुए इसे “दोषी अपराधी की घटिया और निराधार बकवास” बताया था, जिसे “पूरी तरह तिरस्कार के साथ खारिज” किया जाना चाहिए।
उत्तर प्रदेश के बरेली में पिछले साल हुई हिंसा सहित कुछ घटनाओं का हवाला देते हुए सिंह ने सरकार पर नफरत की राजनीति करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि जिस विचारधारा ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को अहिंसा का पुजारी माना था, उसे छीना जा रहा है।
सिंह ने कहा कि नफरत की राजनीति को खत्म किया जाना चाहिए और सभी से “उस विचारधारा को खत्म करने” का आह्वान किया जिसने गांधी की हत्या की थी।
उन्होंने विश्वविद्यालय परिसरों में जाति-आधारित भेदभाव को रोकने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के समानता नियमों पर भी सरकार की आलोचना की। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में इन नियमों पर रोक लगाते हुए कहा था कि यह ढांचा “प्रथम दृष्टया अस्पष्ट” है और समाज को “खतरनाक तरीके से विभाजित” कर सकता है।
सिंह ने कहा, “आपने पूरे देश में टकराव का माहौल बना दिया है,” और सरकार पर दलित-विरोधी होने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि भाजपा के वैचारिक स्रोत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के 100 वर्षों के अस्तित्व में भी कभी कोई दलित प्रमुख नहीं बना।
सिंह ने कहा, “आपने इस देश की विश्वविद्यालयों में आरक्षण खत्म कर दिया है… विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर और सहायक प्रोफेसर के 80 प्रतिशत से अधिक पद, जो दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों के लिए थे, खाली पड़े हैं। फिर आप कैसे दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों के हितैषी हो सकते हैं?”
उन्होंने कहा कि देश में 45 केंद्रीय विश्वविद्यालय हैं, जिनमें से 38 के कुलपति ऊंची जातियों से हैं। केवल सात विश्वविद्यालयों में दलितों, पिछड़े वर्गों और आदिवासियों से आने वाले कुलपति हैं।
उन्होंने कहा, “इसका मतलब क्या यह है कि दलित, पिछड़े और आदिवासी कुलपति बनने के योग्य नहीं हैं? यही आपकी मानसिकता है।”
