नीति आयोग के सीईओ ने कहा- भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर नवंबर के अंत तक मिल सकती है “सकारात्मक खबर”

**EDS: THIRD PARTY IMAGE** In this image received on Oct. 6, 2025, Niti Aayog CEO B.V.R Subrahmanyam releases the fourth edition of ‘Trade Watch Quarterly’ report, in New Delhi. (PIB via PTI Photo) (PTI10_06_2025_000164B) *** Local Caption ***

नई दिल्ली, 7 नवंबर (PTI) — नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने शुक्रवार को उम्मीद जताई कि भारत और अमेरिका के प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) के संबंध में नवंबर के अंत तक कुछ सकारात्मक खबरें सामने आ सकती हैं।

‘CNBC-TV18 ग्लोबल लीडरशिप समिट 2025 – दूसरा संस्करण’ में बोलते हुए सुब्रह्मण्यम ने कहा कि इसी महीने के अंत तक राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन भी शुरू हो जाएगा।

उन्होंने कहा, “संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ स्थिति थोड़ी कठिन रही है, और ऐसा लगता है कि इसे सुधारने की कोशिश की जा रही है। व्यापार वार्ता चल रही है… उम्मीद है कि महीने के अंत तक हमें इस मामले में कुछ खबरें सुनने को मिल सकती हैं।”

सुब्रह्मण्यम ने यह भी बताया कि विदेशी निवेशक अभी भी लगातार भारत की ओर आकर्षित हो रहे हैं। उन्होंने कहा, “अमेरिकी कंपनियां भारत में वैश्विक क्षमता केंद्र खोल रही हैं। इसका मतलब यह है कि भारत की बुनियादी आकर्षकता सब पर भारी पड़ेगी।”

उनकी टिप्पणियों का महत्व इसलिए बढ़ गया है क्योंकि अमेरिका भारत पर रूस से कच्चा तेल खरीदने पर दबाव डाल रहा है। अमेरिका ने अक्टूबर 22 को रूस की दो सबसे बड़ी तेल कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर प्रतिबंध लगाया था, जिससे अमेरिकी संस्थाओं और व्यक्तियों को उनके साथ व्यापार करने से रोका गया।

सुब्रह्मण्यम ने कहा कि दुनिया अब अस्थिर स्थिति में है, जहां व्यापार और FDI धीमा या घट रहा है। “इस सब में, भारत एक प्रमुख उदाहरण है। यह वैश्विक अर्थव्यवस्था में सबसे उज्जवल स्थान है, और यही इसे महत्वपूर्ण बनाता है।”

उन्होंने कहा कि भारत की ताकत इसकी विशालता, बाजार और नवाचारी प्रतिभा में है। “इसलिए अन्य देश भारत की ओर खिंचे चले आएंगे। इसलिए जरूरी नहीं कि भारत को अमेरिका और BRICS के बीच पक्ष चुनना पड़े।”

सुब्रह्मण्यम ने कहा कि भारत जितना अधिक अपनी आंतरिक क्षमता विकसित करेगा, दुनिया उतना ही अधिक सकारात्मक नजर से नई दिल्ली को देखेगी।

राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन के बारे में उन्होंने कहा, “यह भारत के विनिर्माण परिदृश्य को बदलने जा रहा है। यह केवल धन खर्च करने का मामला नहीं है, बल्कि क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।”

चीन के साथ भारत के पुनः संपर्क पर उन्होंने कहा, “दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं महत्वपूर्ण हैं, इसलिए हम उनके साथ कुछ आर्थिक संबंध बनाएंगे। अगर कोई देश विश्व अर्थव्यवस्था का 20 प्रतिशत है, तो आप 20 प्रतिशत अर्थव्यवस्था को बंद नहीं कर सकते। यह वास्तविकता है।”

सुब्रह्मण्यम ने स्पष्ट किया कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वदेशी की बात करते हैं, तो उनका मतलब संरक्षणवाद नहीं है, बल्कि यह है कि भारत को आश्चर्यजनक परिस्थितियों से सुरक्षित रखना और आवश्यक होने पर आत्मनिर्भर बनाना।

श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज

SEO टैग्स: #स्वदेशी, #न्यूज, प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर नवंबर के अंत तक सकारात्मक खबर आने की संभावना: नीति आयोग सीईओ