
बहराइच (उत्तर प्रदेश), 14 सितंबर (भाषा): नेपाल में नई सरकार बनने के साथ ही भारत-नेपाल सीमा पर हालात सामान्य होते नजर आ रहे हैं।
शनिवार को यहां रुपईडीहा सीमा पर यात्री वाहनों, कारों, मोटरसाइकिलों, पैदल यात्रियों और मालवाहक ट्रकों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई। जहां बड़ी संख्या में वाणिज्यिक मालवाहक वाहन सीमा पार गए, वहीं आम नागरिकों की आवाजाही अपेक्षाकृत कम रही।
सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की 42वीं बटालियन के कमांडेंट गंगा सिंह उदावत ने पीटीआई से कहा, “नेपाल में नई सरकार बनने के बाद हालात सामान्य होने लगे हैं। इसलिए हमने आज किसी को नहीं रोका, हालांकि हमने लोगों को देश में प्रवेश केवल उनकी पहचान सुनिश्चित करने के बाद ही दिया।” उन्होंने बताया कि सीमा चौकियों पर नागरिकों और वाहनों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
आम तौर पर प्रतिदिन करीब 50,000 लोग रुपईडीहा सीमा पार करते हैं, लेकिन शनिवार को यह संख्या केवल लगभग 20,000 रही। कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जा रहे लगभग 20 भारतीय तीर्थयात्रियों का एक समूह भी रुपईडीहा से सीमा पार गया।
भारतीय भू-पोर्ट प्राधिकरण के प्रभारी अधिकारी सुधीर शर्मा ने कहा, “पांच दिनों से फंसे ट्रकों, लॉरियों, टैंकरों और कंटेनरों के ड्राइवरों और सहायकों के चेहरे खुशी से खिले थे। सभी को शनिवार को नेपाल भेज दिया गया और नेपालगंज में फंसे सभी मालवाहक वाहन हमारे देश लौट आए।”
शर्मा ने पुष्टि की कि रुपईडीहा के एकीकृत चेकपोस्ट (आईसीपी) से नेपाल को डीजल, पेट्रोल, गैस और खाद्य सामग्री से लदे 500 से अधिक मालवाहक वाहन भेजे गए। वहीं सैकड़ों खाली वाहन भी माल की आपूर्ति करने के बाद भारत लौट आए।
उन्होंने कहा कि रुपईडीहा-नेपालगंज सीमा अब पूरी तरह से फंसे वाहनों से खाली हो गई है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि यह सीमा भारतीय व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यहां से 99 प्रतिशत कारोबार निर्यात का होता है और केवल एक प्रतिशत आयात का। उन्होंने कहा, “हम नेपाल से केवल हर्बल दवाइयां आयात करते हैं और आज भी नेपाल से हर्बल दवाइयों से भरे दो ट्रक आए हैं।”
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