नई दिल्ली, 7 जुलाई (PTI) — यंग इंडियन ने सोमवार को दलील दी कि आयकर विभाग ने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) — जो नेशनल हेराल्ड अखबार प्रकाशित करता है — को दिए गए कथित 90 करोड़ रुपये के लोन को “फर्जी लेन-देन” बताया था और कहा था कि “पैसे का कोई प्रवाह नहीं हुआ”, फिर भी यह प्रवर्तन निदेशालय (ED) के केस का आधार कैसे बन गया।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी, दिवंगत कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडीस, सुमन दुबे, सैम पित्रोदा और एक निजी कंपनी यंग इंडियन पर साजिश और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया है। आरोप है कि AJL की 2,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्तियों का धोखाधड़ी से अधिग्रहण किया गया।
ED का दावा है कि गांधी परिवार यंग इंडियन के 76% शेयर का मालिक था, जिसने AJL की संपत्तियों पर 90 करोड़ रुपये के लोन के बदले धोखाधड़ी से अधिकार जमा लिया।
सोमवार को यंग इंडियन की ओर से पेश वकील ने कहा, “अगर सरकार की दो एजेंसियां अलग-अलग रुख अपनाती हैं, तो अपराध कैसे बनता है?” उन्होंने कहा कि शिकायत “अवास्तविकताओं से भरी हुई” थी और उसमें “मूल रूप से अविश्वसनीय आरोप” थे।
वकील ने यह भी कहा, “ED को कानूनी रूप से आरोपों की सत्यता की जांच करनी चाहिए थी। लेकिन न तो सतही जांच हुई, न ही गहराई से पड़ताल। शिकायत किसी सरकारी अधिकारी की नहीं, बल्कि एक निजी नागरिक (सुब्रमण्यम स्वामी) की है। स्वामी 2,000 करोड़ रुपये की संपत्ति का आंकड़ा कहां से लाते हैं?”
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रमोद कुमार दुबे, जो एक अन्य आरोपी डोटेक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड की ओर से पेश हुए, ने कहा कि ED ने बिना भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की शिकायत की प्रमाणित प्रति लिए ECIR (FIR के समकक्ष) दर्ज कर दी।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मामले से जुड़े कुछ दस्तावेज, जैसे लोन की वापसी, उस पर ब्याज आदि, एजेंसी द्वारा छिपा लिए गए।
उन्होंने ED की कार्रवाई पर तंज कसते हुए कहा, “आप देश के सबसे अच्छे शेफ हो सकते हैं, लेकिन चावल के बिना बिरयानी नहीं बना सकते। ED ने इस केस में लकड़ी का जंगल देखा, पर पेड़ नहीं।”
डोटेक्स, सुमन दुबे, सैम पित्रोदा और यंग इंडियन के वकीलों ने सोमवार को आरोप पत्र पर संज्ञान लेने को लेकर ED के तर्कों को खारिज कर दिया।
गांधी परिवार भी पहले ही ED के दावों का विरोध कर चुका है।
सैम पित्रोदा की ओर से पेश वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल अब शिकागो में रहते हैं और उन्हें इस कथित अपराध में कोई स्पष्ट भूमिका नहीं दी गई है। उन्होंने “कानून के दायरे में रहकर” काम किया।
उन्होंने कहा, “मुझ पर आरोप है कि मैंने अप्रत्यक्ष रूप से AJL की संपत्तियों को हासिल करने की कोशिश की। यह दावा गलत है क्योंकि शेयरहोल्डिंग से संपत्ति का अधिकार नहीं मिलता। AJL की संपत्तियों को पुनर्जीवित करने और प्रकाशन को चालू रखने की योजना थी। मेरे खिलाफ कोई अप्रत्यक्ष जिम्मेदारी नहीं बनती।”
सुमन दुबे की ओर से वकील ने कहा कि शिकायत में “अपराध से अर्जित धन” के सृजन का कोई उल्लेख नहीं है।
वकील ने कहा, “जिस पत्र से लोन मांगा गया था, उस पर सुमन दुबे ने हस्ताक्षर किए थे — यही आरोप है। मुझे डोटेक्स मर्चेंडाइज की उत्पत्ति के बारे में जानकारी नहीं थी। जब लोन लिया गया था, तब यह कंपनी आरबीआई द्वारा अनुमोदित एनबीएफसी थी।”
उन्होंने मामले को “भ्रामक केस” बताया और कहा, “AJL और यंग इंडियन ने जो कुछ भी किया वह सब सार्वजनिक रिकॉर्ड में है और उनके संप्रभु कार्यों के अंतर्गत था। इस मामले में किसी कॉरपोरेट परदा उठाने की जरूरत नहीं है।”
डोटेक्स की ओर से बहस 8 जुलाई को भी जारी रहेगी।
ED ने कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम (PMLA) की धारा 3 (मनी लॉन्ड्रिंग) और धारा 4 (सजा) के तहत आरोप पत्र दाखिल किया है।
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