
नई दिल्ली, 12 जनवरी (पीटीआई): नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी अपनी नई पुस्तक “करुणा” में यह गहराई से पड़ताल करते हैं कि करुणा का वास्तविक अर्थ क्या है और सामाजिक तथा आंतरिक परिवर्तन में इसकी बुनियादी भूमिका क्या है।
यह पुस्तक 17 जनवरी को जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) के आगामी संस्करण में जारी की जाएगी। पुस्तक में तर्क दिया गया है कि “करुणा न्याय, समानता, शांति और स्थिरता की ओर जाने का सबसे ठोस मार्ग है” और इसमें “करुणा के वैश्वीकरण” का आह्वान किया गया है।
इसका प्रकाशन हार्पर कॉलिन्स इंडिया द्वारा किया गया है।
72 वर्षीय ‘सत्यार्थी मूवमेंट फॉर ग्लोबल कंपैशन’ के संस्थापक सत्यार्थी ने एक बयान में कहा, “इस पुस्तक में मैं एक नई अवधारणा पेश कर रहा हूं — ‘करुणा गुणांक’ (Compassion Quotient – CQ), जो व्यक्तियों और संगठनों में करुणा को मापने और बढ़ाने का एक वैज्ञानिक तरीका है। आज करुणा कोई विकल्प नहीं, बल्कि मानवता के अस्तित्व के लिए ऑक्सीजन बन चुकी है।
“अपनी सुप्त करुणा — ‘करुणा’ — को जाग्रत और विकसित करके, यह पुस्तक आपके भीतर छिपे समस्या-समाधानकर्ता और परिवर्तनकर्ता को खोजने में मदद करेगी।”
कैलाश सत्यार्थी को वर्ष 2014 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्होंने दुनिया भर में वंचित बच्चों और समुदायों के अधिकारों और गरिमा की रक्षा के लिए पांच दशकों से अधिक समय समर्पित किया है।
प्रकाशक के अनुसार, यह पुस्तक पाठकों को दिखाती है कि करुणा ही हमारी व्यक्तिगत, सामाजिक और वैश्विक समस्याओं का उत्तर है और एक बेहतर भविष्य की कुंजी भी।
हार्पर कॉलिन्स इंडिया के कार्यकारी प्रकाशक उदयन मित्रा ने कहा, “अपनी नई पुस्तक में नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी हमें करुणा की शक्ति के माध्यम से मतभेदों और कठिनाइयों को सुलझाने तथा एक बेहतर कल बनाने का सरल और प्रभावी तरीका दिखाते हैं। यह ऐसी पुस्तक है जिसे हर किसी को पढ़ना चाहिए। हमें गर्व है कि हम इसे पाठकों तक पहुंचा रहे हैं।”
सत्यार्थी की पहले प्रकाशित पुस्तकों में “एवरी चाइल्ड मैटर्स”, “द बुक ऑफ कंपैशन” और “व्हाय डिडन’t यू कम सूनर?” शामिल हैं।
399 रुपये कीमत वाली “करुणा” फिलहाल ऑनलाइन प्री-ऑर्डर के लिए उपलब्ध है।
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