नई दिल्ली, 3 जुलाई (पीटीआई):
कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने गुरुवार को आरोप लगाया कि पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर मोदी सरकार का ट्रैक रिकॉर्ड भरोसा जगाने वाला नहीं है कि इन विषयों पर चर्चा या समाधान होगा। रमेश, जो पूर्व पर्यावरण मंत्री भी हैं, ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए काम कर रहे कई कार्यकर्ता और संगठन प्रधानमंत्री को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए पत्र लिख चुके हैं।
एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट में रमेश ने बताया कि 150 नागरिक समाज समूहों और कार्यकर्ताओं ने पाँच मुख्य मुद्दे उठाए हैं। इनमें पहला है—पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव का वह बयान, जिसमें कथित तौर पर 2006 के वन अधिकार अधिनियम के लागू होने को “प्रमुख वन क्षेत्रों के क्षरण और नुकसान” के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है।
रमेश ने कहा कि कार्यकर्ताओं ने संसद और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के समक्ष वन क्षेत्रों पर अतिक्रमण के संबंध में कानूनी रूप से अवैध आंकड़ों की निरंतर प्रस्तुति का मुद्दा भी उठाया है।
उन्होंने यह भी बताया कि जून 2024 में नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी द्वारा देशभर के टाइगर रिजर्व से लगभग 65,000 परिवारों को बेदखल करने के आदेश का मुद्दा भी उठाया गया।
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि कार्यकर्ताओं और संगठनों ने पिछले एक दशक में वन क्षेत्र में आई कमी के लिए भारतीय वन सर्वेक्षण द्वारा 2006 के वन अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन को गलत तरीके से जिम्मेदार ठहराने का मुद्दा भी उठाया है।
रमेश ने आगे कहा कि 1980 के वन (संरक्षण) अधिनियम में 2023 में किए गए संशोधन, जिन्हें संसद में जबरन पारित किया गया, और उसके बाद लागू वन संरक्षण एवं संवर्द्धन नियम, 2023—इन दोनों का भी विरोध किया गया, क्योंकि ये वनों की मात्रा और गुणवत्ता दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं567।
उन्होंने कहा, “ये मुद्दे विशेष रूप से उन आदिवासी और अन्य समुदायों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, जो वन क्षेत्रों में रहते हैं और अपनी आजीविका कमाते हैं। ये पारिस्थितिकीय सुरक्षा के लिए भी बुनियादी महत्व के हैं।”
रमेश ने कहा, “मोदी सरकार का ट्रैक रिकॉर्ड ऐसा नहीं है कि इन मुद्दों पर चर्चा या बहस भी की जाएगी, जिन पर लोगों को प्रधानमंत्री का ध्यान आकर्षित करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।”
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