
जबलपुर, 1 जून (PTI): कांग्रेस नेता और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शनिवार को केंद्र सरकार से सवाल किया कि 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के दौरान पर्यटकों की सुरक्षा क्यों नहीं की गई, और क्या अमेरिका के दबाव में पाकिस्तान के साथ “सीज़फायर” (संघर्षविराम) पर सहमति बनी?
कांग्रेस की ‘जय हिंद सभा’ में बोलते हुए बघेल ने कहा कि आतंकवादी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत ने 7 मई को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर ऑपरेशन सिंदूर चलाया। इसके बाद पाकिस्तान ने ड्रोन और मिसाइल से जवाबी कार्रवाई की, लेकिन कोई नुकसान नहीं पहुंचा। दोनों देशों ने 10 मई को संघर्षविराम की घोषणा की।
मुख्य आरोप और सवाल:
- पहलगाम में सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं थी?
- हमले में शामिल चार आतंकवादी कहां हैं?
- क्या अमेरिका के दबाव में सीज़फायर हुआ?
- इस निर्णय को सरकार ने लिया या अधिकारियों ने?
बघेल ने आरोप लगाया कि भाजपा ऑपरेशन सिंदूर का राजनीतिकरण कर रही है और कहा कि “सेना किसी पार्टी की नहीं, पूरे देश की होती है।”
राजनीतिक पृष्ठभूमि:
- यह कार्यक्रम भोपाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महिला सशक्तिकरण रैली के समानांतर आयोजित किया गया था।
- कांग्रेस पूरे देश में ‘जय हिंद सभा’ कर रही है, जबकि भाजपा ‘तिरंगा यात्रा’ निकाल रही है।
भूपेश बघेल ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह और उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के आपत्तिजनक बयानों के लिए माफी मांगनी चाहिए और उन्हें मंत्रिमंडल से बर्खास्त करना चाहिए।
इतिहास से तुलना:
बघेल ने 2013 के झीरम घाटी नक्सली हमले की याद दिलाते हुए कहा कि उसमें भी नाम पूछकर कांग्रेस नेताओं की हत्या की गई थी, जैसा कि पहलगाम में धर्म पूछकर किया गया।
दिग्विजय सिंह का बयान:
सभा में कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि जो लोग आज सेना को प्रधानमंत्री मोदी के चरणों में समर्पित बता रहे हैं, उनका स्वतंत्रता संग्राम में कोई योगदान नहीं रहा और वे अंग्रेजों के गुलाम रहे हैं।
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