
नई दिल्ली, 23 अक्टूबर (पीटीआई): रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ तीनों सेनाओं की असाधारण समन्वय क्षमता का उदाहरण है और पाकिस्तान अभी भी भारत की सेना द्वारा दिए गए “गंभीर झटके” से उबर नहीं पाया है।
उन्होंने कहा कि यह अभियान भारत के इस संकल्प को दोहराता है कि देश राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए समन्वित, अनुकूलनशील और पूर्व-नियोजित रणनीतियाँ बनाएगा।
राजनाथ सिंह एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर ने तीनों सेनाओं के बीच असाधारण एकजुटता और एकीकरण को प्रदर्शित किया और यह सरकार के उस संकल्प की पुष्टि करता है कि बदलते वैश्विक परिदृश्य और युद्ध के विकसित रूपों से निपटने के लिए समन्वित और पूर्व-नियोजित रक्षा रणनीतियाँ तैयार की जाएँगी।”
रक्षा मंत्री ने कहा कि पारंपरिक रक्षा दृष्टिकोण अब पर्याप्त नहीं है क्योंकि आज युद्ध सीमाओं पर ही नहीं, बल्कि हाइब्रिड और विषम रूपों में भी लड़े जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार ने भविष्य के लिए तैयार सैन्य ढांचा तैयार करने के लिए कई “साहसिक और निर्णायक” सुधार किए हैं ताकि देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और सामरिक स्वायत्तता सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने कहा, “ऐतिहासिक कदमों में से एक था मुख्य रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) का पद सृजित करना, जिसने तीनों सेनाओं के बीच समन्वय को मज़बूती दी।”
राजनाथ सिंह ने कहा, “पूरी दुनिया ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान संयुक्तता और एकीकरण का परिणाम देखा। पाकिस्तान अभी भी हमारी सशस्त्र सेनाओं द्वारा दिए गए गंभीर आघात से उबरने की कोशिश कर रहा है।”
मई महीने में, भारतीय सशस्त्र बलों ने 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित नौ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था।
रक्षा मंत्री ने कहा कि सिविल-मिलिट्री फ्यूज़न (नागरिक-सैन्य एकीकरण) को एक रणनीतिक साधन के रूप में देखा जाना चाहिए, जो नवाचार, प्रतिभा को संरक्षित करता है और देश को तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर करता है।
उन्होंने कहा, “यह एकीकरण तभी संभव है जब हम अपने नागरिक उद्योग, निजी क्षेत्र, शैक्षणिक संस्थान और रक्षा क्षेत्र को एक साझा राष्ट्रीय उद्देश्य के लिए जोड़ें।”
सिंह ने कहा कि आज दुनिया “श्रम विभाजन” से आगे बढ़कर “उद्देश्य के एकीकरण” की ओर बढ़ रही है।
उन्होंने कहा, “हमारी नागरिक प्रशासन और सेना कार्यक्षेत्र में अलग हैं, लेकिन प्रधानमंत्री ने ज़ोर दिया है कि कोई भी प्रशासन अलग-अलग खंडों में नहीं चल सकता; उसे सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाना होगा।”
उन्होंने कहा कि तकनीकी युग में सिविल-मिलिट्री फ्यूज़न अत्यंत आवश्यक है क्योंकि प्रौद्योगिकी, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा अब पहले से कहीं अधिक परस्पर जुड़ी हुई हैं।
उन्होंने कहा, “सूचना, आपूर्ति श्रृंखला, व्यापार, दुर्लभ खनिज और अत्याधुनिक तकनीक — सभी अब नागरिक और सैन्य दोनों क्षेत्रों में समान रूप से उपयोग हो रहे हैं।”
राजनाथ सिंह ने कहा, “ऐसे में सिविल-मिलिट्री फ्यूज़न कोई आधुनिक प्रवृत्ति नहीं बल्कि समय की आवश्यकता है। इसे नज़रअंदाज़ करना रणनीतिक प्रगति के लिए उचित नहीं होगा।”
उन्होंने कहा, “हमारी कई महत्वपूर्ण तकनीकें अभी केवल नागरिक उपयोग तक सीमित हैं। यदि इन्हें दोहरी उपयोग (Dual-Use) के तहत सैन्य उपयोग में भी लाया जाए, तो राष्ट्रीय शक्ति कई गुना बढ़ सकती है।”
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