
नई दिल्ली, 19 अगस्त (पीटीआई) सरकार बुधवार को संसद में तीन विधेयक पेश करने की योजना बना रही है, जिनमें यह प्रावधान होगा कि यदि कोई प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री या किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश का मंत्री गंभीर आपराधिक आरोपों में लगातार 30 दिनों तक गिरफ्तार और हिरासत में रहता है, तो उसे 31वें दिन पद से हटा दिया जाएगा।
यदि इनमें से कोई भी व्यक्ति लगातार 30 दिनों तक ऐसे अपराधों में हिरासत में रहता है, जिनमें कम से कम पांच साल की सजा का प्रावधान है, तो वह 31वें दिन पद पर नहीं रहेगा।
ये विधेयक हैं – सरकार का केंद्र शासित प्रदेश (संशोधन) विधेयक 2025, संविधान (एक सौ तीसवां संशोधन) विधेयक 2025, और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2025।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह लोकसभा में एक प्रस्ताव भी रखेंगे कि इन तीनों विधेयकों को संसद की संयुक्त समिति के पास भेजा जाए।
दिलचस्प बात यह है कि पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और तमिलनाडु मंत्री वी सेंथिल बालाजी अपनी गिरफ्तारी के बाद भी अपने पद से इस्तीफा नहीं दिए थे।
विधेयक में कहा गया है:
“कोई मंत्री, जो अपने पद पर रहते हुए लगातार 30 दिनों तक गिरफ्तार और हिरासत में रहता है और जिस पर किसी ऐसे अपराध का आरोप है जिसकी सजा पांच साल या उससे अधिक हो सकती है, तो प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति 31वें दिन तक उसे पद से हटा देंगे। यदि प्रधानमंत्री ऐसी सलाह नहीं देते हैं, तो वह मंत्री 31वें दिन के बाद स्वतः पद से हटा हुआ माना जाएगा।”
प्रधानमंत्री के संदर्भ में इसमें कहा गया है:
“यदि प्रधानमंत्री लगातार 30 दिनों तक किसी अपराध में गिरफ्तार और हिरासत में रहते हैं, जिसकी सजा पांच साल या उससे अधिक हो सकती है, तो उन्हें 31वें दिन इस्तीफा देना होगा। यदि वे इस्तीफा नहीं देते हैं, तो वे 31वें दिन के बाद स्वतः प्रधानमंत्री पद से हटे हुए माने जाएंगे।”
विधेयकों के उद्देश्य:
- केंद्र शासित प्रदेश (संशोधन) विधेयक 2025 – मौजूदा कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि मुख्यमंत्री या मंत्री को गंभीर आपराधिक मामलों में हिरासत में रहने पर पद से हटाया जा सके। इसलिए कानून में संशोधन की जरूरत है।
- संविधान (एक सौ तीसवां संशोधन) विधेयक 2025 – संविधान में प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री या राज्य मंत्रियों को ऐसे मामलों में हटाने का प्रावधान नहीं है। इसलिए अनुच्छेद 75, 164 और 239AA में संशोधन का प्रस्ताव है।
- जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2025 – मौजूदा कानून में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री या मंत्री को गंभीर आपराधिक मामलों में हिरासत में रहने पर हटाने का प्रावधान नहीं है। इसलिए धारा 54 में संशोधन का प्रस्ताव है।
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