
नई दिल्ली, 21 अक्टूबर (पीटीआई) — उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह तथा अमित शाह ने मंगलवार को पुलिस स्मरण दिवस (Police Commemoration Day) के अवसर पर पुलिस बलों को नमन किया और कहा कि पुलिस कर्मी साहस, करुणा और अटूट कर्तव्यनिष्ठा के प्रतीक हैं।
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि वे पुलिस कर्मियों के “अद्वितीय साहस और सर्वोच्च बलिदान” को नमन करते हैं। उन्होंने लिखा, “राष्ट्र की सुरक्षा और जनता की भलाई सुनिश्चित करने के लिए उनका अटूट समर्पण हमारी गहरी श्रद्धा का पात्र है।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “पुलिस स्मरण दिवस पर हम अपने पुलिस कर्मियों के साहस को सलाम करते हैं और उन वीरों को नमन करते हैं जिन्होंने कर्तव्य निभाते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनकी दृढ़ निष्ठा और समर्पण हमारी राष्ट्र और जनता को सुरक्षित रखते हैं।”
उन्होंने कहा कि संकट के समय में पुलिस का साहस और प्रतिबद्धता प्रशंसनीय है।
हर वर्ष 21 अक्टूबर को पुलिस स्मरण दिवस मनाया जाता है। यह दिन उन 10 केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) जवानों की स्मृति में मनाया जाता है, जो 1959 में लद्दाख के हॉट स्प्रिंग क्षेत्र में चीनी सैनिकों के घात में शहीद हुए थे।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रथम उत्तरदाता के रूप में पुलिस बलों ने अपराधों और आंतरिक सुरक्षा खतरों को विफल कर नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करते हुए गौरवशाली इतिहास रचा है। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, “पुलिस स्मरण दिवस पर पुलिस कर्मियों को हार्दिक शुभकामनाएं और उन शहीदों को श्रद्धांजलि जिन्होंने राष्ट्र की सेवा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।”
अमित शाह ने साथ ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस और भारतीय राष्ट्रीय सेना (आईएनए) के वीर सैनिकों को भी नमन किया। उन्होंने कहा, “आईएनए के माध्यम से नेताजी ने क्रांतिकारियों में यह विश्वास जगाया कि देशवासी अपनी सेना के माध्यम से स्वतंत्रता प्राप्त कर सकते हैं। 1943 में जब नेताजी के नेतृत्व में आईएनए के सैनिकों ने अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में तिरंगा फहराया और स्वतंत्रता की घोषणा की, तब उन्होंने ‘राष्ट्र प्रथम’ भावना को सशक्त किया।”
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित करते हुए कहा कि देश की सीमाओं पर अस्थिरता के साथ-साथ समाज में नए प्रकार के अपराध, आतंकवाद और वैचारिक युद्ध उभर रहे हैं। उन्होंने कहा, “अगर आज जनता चैन की नींद सो रही है, तो यह हमारी सतर्क सशस्त्र सेनाओं और चौकस पुलिस के कारण संभव है।”
उन्होंने नक्सल समस्या का उल्लेख करते हुए कहा कि पुलिस, सीआरपीएफ, बीएसएफ और स्थानीय प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से यह समस्या अब समाप्ति की ओर है। उन्होंने विश्वास जताया कि मार्च अगले वर्ष तक नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
राजनाथ सिंह ने कहा, “जो क्षेत्र कभी नक्सल प्रभावित थे, अब शिक्षा और विकास के केंद्र बन रहे हैं। यह हमारे पुलिस और सुरक्षा बलों की महान उपलब्धि है।”
उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सरकार की राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराया। “लंबे समय तक हमने पुलिस के योगदान को वह सम्मान नहीं दिया जिसके वे हकदार थे, लेकिन 2018 में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय पुलिस स्मारक की स्थापना कर इसे पूरा किया गया,” उन्होंने कहा।
सिंह ने जोड़ा कि आज पुलिस को अत्याधुनिक हथियार, आधुनिक उपकरण, निगरानी प्रणाली, ड्रोन, फॉरेंसिक प्रयोगशालाएं और डिजिटल पुलिसिंग जैसी सुविधाएं दी गई हैं।
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