प्रमुख विदेश नीति संबोधन में पोप ने देशों द्वारा प्रभुत्व जताने के लिए बल प्रयोग की कड़ी निंदा की

Pope Leo XIV arrives to preside over the first Vespers and the 'Te Deum' in St. Peter's Basilica at the Vatican, Wednesday, Dec. 31, 2025. AP/PTI(AP12_31_2025_000449B)

वेटिकन सिटी, 9 जनवरी (एपी) अमेरिका, रूस और अन्य देशों द्वारा संप्रभु राष्ट्रों में सैन्य हस्तक्षेप की अब तक की अपनी सबसे कड़ी आलोचना में, पोप लियो चतुर्दश (Leo XIV) ने शुक्रवार को दुनियाभर में प्रभुत्व स्थापित करने के लिए देशों द्वारा बल प्रयोग की निंदा की और कहा कि इससे शांति तथा द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था “पूरी तरह कमजोर” हो रही है।

पोप लियो ने होली सी में अपने-अपने देशों का प्रतिनिधित्व करने वाले दुनियाभर के राजदूतों को संबोधित करते हुए कहा, “युद्ध फिर से फैशन में आ गया है और युद्ध के प्रति जुनून फैलता जा रहा है।”

हालांकि अपने लंबे भाषण में उन्होंने किसी भी देश का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया, लेकिन यह संबोधन ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ने वेनेजुएला में निकोलस मादुरो को सत्ता से हटाने के लिए सैन्य अभियान चलाया, रूस-यूक्रेन युद्ध जारी है और दुनिया के अन्य हिस्सों में भी संघर्ष चल रहे हैं।

यह अवसर वेटिकन के राजनयिक कोर के साथ पोप की वार्षिक मुलाकात का था, जिसे परंपरागत रूप से उनका सालाना विदेश नीति संबोधन माना जाता है।

इतिहास के पहले अमेरिका में जन्मे पोप ने अपने पहले ऐसे संबोधन में केवल वैश्विक संघर्ष क्षेत्रों का जिक्र ही नहीं किया, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता पर खतरों, गर्भपात और सरोगेसी के प्रति कैथोलिक चर्च के विरोध जैसे मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और बहुपक्षीय व्यवस्था को लेकर बढ़ते खतरों पर भी चिंता जताई।

उन्होंने कहा, “संवाद को बढ़ावा देने और सभी पक्षों के बीच सहमति तलाशने वाली कूटनीति की जगह अब बल पर आधारित कूटनीति ले रही है, चाहे वह किसी एक देश द्वारा हो या सहयोगी देशों के समूह द्वारा।”

उन्होंने आगे कहा, “द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्थापित वह सिद्धांत, जिसके तहत देशों को दूसरों की सीमाओं का उल्लंघन करने के लिए बल प्रयोग से रोका गया था, पूरी तरह कमजोर कर दिया गया है। अब शांति को हथियारों के माध्यम से हासिल करने की कोशिश की जा रही है, ताकि अपना प्रभुत्व स्थापित किया जा सके। यह कानून के शासन के लिए गंभीर खतरा है, जो शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की नींव है।”

पोप लियो ने वेनेजुएला की स्थिति का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए वहां शांतिपूर्ण राजनीतिक समाधान का आह्वान किया और कहा कि इसमें “जनता के साझा हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, न कि दलगत हितों की रक्षा की जाए।” अमेरिका ने हाल ही में एक गुप्त रात्री अभियान में वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो को हिरासत में लिया था। ट्रंप प्रशासन अब वेनेजुएला के तेल संसाधनों और सरकार पर नियंत्रण की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी सरकार का कहना है कि मादुरो की गिरफ्तारी कानूनी है और ड्रग कार्टेल के खिलाफ उसे सशस्त्र संघर्ष की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।

विश्लेषकों और कई विश्व नेताओं ने इस कार्रवाई की निंदा की है और चेतावनी दी है कि मादुरो को हटाने से और अधिक सैन्य हस्तक्षेपों का रास्ता खुल सकता है, जिससे वैश्विक कानूनी व्यवस्था और कमजोर होगी।

यूक्रेन के मुद्दे पर पोप ने तत्काल युद्धविराम की अपनी अपील दोहराई और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से “न्यायपूर्ण और स्थायी समाधान” के लिए प्रतिबद्ध रहने का आग्रह किया। गाजा के संदर्भ में उन्होंने इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष के लिए दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन दोहराया और कहा कि फिलिस्तीनियों को गाजा और वेस्ट बैंक में “अपनी ही भूमि पर” रहने का अधिकार है। (एपी)

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