प्रयागराज में माघ मेले की शुरुआत के साथ ही लाखों लोगों ने बर्फीले संगम के पानी में स्नान किया।

Prayagraj: An aerial view of people taking a holy dip at Sangam on the occasion of 'Paush Purnima', marking the start of the 'Magh Mela' festival, on a cold winter morning, in Prayagraj, Saturday, Jan. 3, 2026. (PTI Photo) (PTI01_03_2026_000011B)

प्रयागराज, 3 जनवरी(पीटीआई)शनिवार को माघ मेले की शुरुआत के साथ ही ‘पौष पूर्णिमा’ पर यहां संगम के बर्फीले ठंडे पानी में बुजुर्गों और बच्चों सहित अलग-अलग जगहों से आए लाखों श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई।

एक महीने तक चलने वाला ‘कल्पवास’, जिसके बारे में माना जाता है कि यह लोगों को उनके पापों से मुक्ति दिलाता है, वह भी ‘पौष पूर्णिमा’ से शुरू हो गया। ‘कल्पवास’ के दौरान, श्रद्धालु हर दिन गंगा में दो बार स्नान करते हैं और दिन में एक बार भोजन करते हैं, बाकी समय वे ध्यान और अपने चुने हुए देवता की पूजा में बिताते हैं।

माघ मेला अधिकारियों के अनुसार, सुबह 10 बजे तक लगभग 9 लाख श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान किया था।

त्रिवेणी संगम आरती सेवा समिति के अध्यक्ष आचार्य राजेंद्र मिश्रा ने पीटीआई को बताया कि लगभग 5 लाख श्रद्धालु शनिवार को अपना ‘कल्पवास’ शुरू करेंगे।

कड़ाके की ठंड के कारण सुबह श्रद्धालुओं की संख्या थोड़ी कम थी, लेकिन उम्मीद है कि दिन बढ़ने के साथ यह संख्या बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि ‘पौष पूर्णिमा’ का स्नान पूरे दिन जारी रहेगा।

प्रयाग धाम संघ के अध्यक्ष राजेंद्र पालीवाल ने कहा कि शाम तक ‘पौष पूर् पूर्णिमा’ पर कल्पवासियों सहित लगभग 20 लाख श्रद्धालुओं के पवित्र स्नान करने की उम्मीद है।

स्नान के लिए शुभ मुहूर्त शाम 4 बजे तक है। उन्होंने कहा कि कल्पवासी स्नान करने के बाद अपने पुजारियों से ‘कल्पवास’ का संकल्प लेंगे और मेले में ही रहेंगे।

प्रयागराज मंडल आयुक्त सौम्या अग्रवाल के अनुसार, ‘पौष पूर्णिमा’ पर गंगा और संगम में 20-30 लाख श्रद्धालुओं के स्नान करने की उम्मीद है।

माघ मेले में 10,000 वर्ग फुट के क्षेत्र में दस स्नान घाट बनाए गए हैं, और नौ पोंटून पुल बनाए गए हैं।

कोलकाता से अपने परिवार के साथ पवित्र स्नान करने आईं पूजा झा ने कहा कि उन्हें माघ मेले में आकर बहुत अच्छा लगा।

उन्होंने कहा कि क्योंकि यह स्नान का पहला दिन था, इसलिए भीड़ थोड़ी कम थी। इससे लोगों को आराम से स्नान करने का मौका मिला। मध्य प्रदेश के रीवा की शिवानी मिश्रा ने कहा कि वह महाकुंभ के दौरान तीन बार नहाने आईं और माघ मेले में कम भीड़ होने की वजह से उन्हें शांति से नहाने का अनुभव मिला।

एडमिरल (माघ मेला) दयानंद प्रसाद ने कहा कि पहली बार माघ मेला क्षेत्र में तीर्थयात्रियों (कल्पवासियों) के लिए एक अलग टाउनशिप बनाई गई है। 950 बीघा में फैली इस टाउनशिप का नाम प्रयागवाल रखा गया है।

यह नागवासुकी मंदिर के सामने स्थित है।

‘पौष पूर्णिमा’ के अलावा, माघ मेला 2026 के मुख्य स्नान के मौके मकर संक्रांति (14 जनवरी), मौनी अमावस्या (18 जनवरी), बसंत पंचमी (23 जनवरी), माघी पूर्णिमा (1 फरवरी) और महाशिवरात्रि (15 फरवरी) हैं। पीटीआई राज नव डिवीज़न डिवीज़न

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