फर्जी सामग्री पर आईटी नियमों को रद्द करने वाले बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ केंद्र की याचिका की जांच करेगा सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली, 10 मार्च (पीटीआई): सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र की उस याचिका की जांच करने पर सहमति जताई, जिसमें सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ फर्जी और गलत सामग्री को नियंत्रित करने के उद्देश्य से सूचना प्रौद्योगिकी नियमों में 2023 में किए गए संशोधनों को रद्द करने वाले बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है।

हालांकि, शीर्ष अदालत ने 2024 के बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसमें संशोधित सूचना प्रौद्योगिकी नियमों को न केवल रद्द किया गया था बल्कि उन्हें “असंवैधानिक” भी करार दिया गया था।

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति आर महादेवन तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने मूल याचिकाकर्ताओं को नोटिस जारी किए, जिनमें स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया और एसोसिएशन ऑफ इंडियन मैगजीन शामिल हैं।

हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि बेहतर होगा कि पूरे मुद्दे का अंतिम रूप से फैसला किया जाए।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 26 सितंबर 2024 को औपचारिक रूप से संशोधित सूचना प्रौद्योगिकी नियमों को रद्द कर दिया था, जिनका उद्देश्य सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ फर्जी और गलत सामग्री की पहचान करना और उसे नियंत्रित करना था।

सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग की और तर्क दिया कि सरकार का उद्देश्य “सामग्री को पूरी तरह से ब्लॉक करना” नहीं है, बल्कि गलत सूचना को नियंत्रित करना है।

आईटी नियमों में ये विवादास्पद संशोधन केंद्र सरकार द्वारा 6 अप्रैल 2023 को सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशा-निर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के हिस्से के रूप में पेश किए गए थे।

इन नियमों के तहत एफसीयू को सरकार की गतिविधियों से संबंधित किसी भी ऐसी सामग्री की निगरानी करने और उसे चिन्हित करने का अधिकार दिया गया था जिसे फर्जी या भ्रामक माना जाए। यदि ऐसी सामग्री चिन्हित की जाती, तो सोशल मीडिया मध्यस्थों के पास या तो उस सामग्री को हटाने या उस पर अस्वीकरण लगाने का विकल्प होता, लेकिन यदि वे दूसरा विकल्प चुनते तो उन्हें कानूनी परिणामों का जोखिम उठाना पड़ सकता था।

पीटीआई