बेंगलुरु, 20 जनवरी (पीटीआई): रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) अगली पीढ़ी की इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (ईडब्ल्यू) तकनीकों, स्पेक्ट्रम डॉमिनेंस और स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रमों पर विशेष जोर दे रहा है। डीआरडीओ के महानिदेशक (इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन सिस्टम्स) बी के दास ने मंगलवार को कहा कि संगठन का फोकस आत्मनिर्भरता और भविष्य के युद्ध क्षेत्रों पर केंद्रित है।
इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर कॉन्फ्रेंस-इंडिया (EWCI) के इतर पीटीआई से बातचीत में दास ने कहा कि इस सम्मेलन का उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर से जुड़े सभी हितधारकों—उद्योग, शिक्षाविदों और शोध संस्थानों—को एक साझा लक्ष्य के लिए एक मंच पर लाना है, क्योंकि यह युद्ध का क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है।
उन्होंने कहा कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत स्वदेशी तकनीक विकास और वैश्विक भागीदारी को लगातार बढ़ावा मिल रहा है। भविष्य की परियोजनाओं को लेकर दास ने बताया कि डीआरडीओ ऐसी उन्नत तकनीकों पर काम कर रहा है जो आने वाले दशकों में युद्ध की प्रकृति को बदल देंगी।
“भविष्य के प्रमुख फोकस क्षेत्रों में संज्ञानात्मक सीख (कॉग्निटिव लर्निंग) के साथ स्पेक्ट्रम डॉमिनेंस, फोटोनिक्स और क्वांटम जैसी नई तकनीकें शामिल हैं,” उन्होंने कहा। इनके जरिए इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर में अधिक लचीलापन, फुर्ती और निर्णायक क्षमता मिलेगी।
फोटोनिक्स प्रकाश से जुड़ा विज्ञान और तकनीक है, जो फोटॉनों के उत्पादन, नियंत्रण, पहचान और उपयोग पर केंद्रित होती है और दूरसंचार, कंप्यूटिंग, चिकित्सा तथा अन्य उन्नत तकनीकों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
बजट को लेकर पूछे गए सवाल पर दास ने स्पष्ट किया कि वित्तीय संसाधन कभी बाधा नहीं रहे हैं। “डीआरडीओ के लिए बजट कभी समस्या नहीं रहा। मंत्रालय की ओर से हमें हमेशा पूरा समर्थन मिला है,” उन्होंने कहा। उनका कहना था कि लक्ष्य 2047 तक भारत को वैश्विक रक्षा तकनीक का अग्रणी बनाना है।
स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रमों पर बोलते हुए दास ने कहा कि भारत को अपने प्लेटफॉर्म, हथियार और सेंसर के दम पर आसमान पर प्रभुत्व स्थापित करना होगा। “लड़ाकू विमान हमारे अपने होने चाहिए, जिनमें स्वदेशी तकनीक और स्वदेशी हथियार लगे हों,” उन्होंने कहा। उन्होंने बताया कि एलसीए तेजस एमके-1 और एमके-1ए तैयार हैं और यह केवल शुरुआत है। एमके-2 और एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक हवाई युद्ध में स्टेल्थ अत्यंत महत्वपूर्ण है। “अगर आपको आसमान पर राज करना है, तो स्टेल्थ ही भविष्य का रास्ता है,” उन्होंने कहा। एएमसीए परियोजना को मंजूरी मिल चुकी है और इसे एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए), हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) और डीआरडीओ मिलकर आगे बढ़ा रहे हैं।
दास ने स्वदेशी सेंसर और हथियार प्रणालियों में हुई प्रगति का भी जिक्र किया और कहा कि उत्तम एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे (AESA) रडार ने अपनी क्षमताएं साबित कर दी हैं। “हम अपना रडार विकसित कर रहे हैं। उत्तम AESA रडार कई मामलों में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ रडारों से भी बेहतर साबित हुआ है,” उन्होंने कहा।
उन्होंने बताया कि यह रडार जैमर, हथियार प्रणालियों और मिसाइलों के साथ लड़ाकू विमानों में एकीकरण के लिए तैयार है। समय-सीमा का जिक्र करते हुए दास ने कहा कि एलसीए एमके-1 तैयार है, एमके-1ए की आपूर्ति तय कार्यक्रम के अनुसार होगी, एमके-2 तीन से चार वर्षों में सामने आएगा और इसके बाद एएमसीए, जिससे भारत पूरी तरह स्वदेशी लड़ाकू विमानों को तैनात कर सकेगा।
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