
कोलकाता, 13 जनवरी (पीटीआई) फेडरेशन ऑफ एसोसिएशंस ऑफ कॉटेज एंड स्मॉल इंडस्ट्रीज़ (FACSI) ने 2026-27 के केंद्रीय बजट में सूक्ष्म और लघु उद्यमों (एमएसई) के लिए कर, ऋण और नियामकीय राहत उपायों की मांग की है, ताकि उनकी विकास गति बनी रहे और औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र में उनकी भूमिका को और मजबूत किया जा सके।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को भेजे गए बजट-पूर्व पत्र में FACSI के अध्यक्ष एच. के. गुहा ने कहा कि ये सुझाव देशभर के उद्यमी संगठनों और एमएसई समूहों से परामर्श के बाद तैयार किए गए हैं।
FACSI की प्रमुख मांगों में एमएसएमई मंत्रालय के तहत सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए एक अलग परिषद के गठन, जीएसटी व्यवस्था में छूट की सीमा बढ़ाने और छोटी इकाइयों के लिए एकल व सरल जीएसटी रिटर्न लागू करने का प्रस्ताव शामिल है।
संघ ने एमएसई के लिए एक करोड़ रुपये तक वैधानिक रूप से बिना गारंटी ऋण उपलब्ध कराने की मांग की है, जिस पर ब्याज दर 6 से 7 प्रतिशत के बीच सीमित हो। इसके साथ ही वित्तीय दबाव के समय ब्याज सब्सिडी देने और बैंकिंग मानकों का पालन करने वाली इकाइयों के लिए कार्यशील पूंजी सीमा के स्वत: नवीनीकरण का भी सुझाव दिया गया है।
तरलता की समस्या को रेखांकित करते हुए FACSI ने 15 दिनों के भीतर जीएसटी रिफंड सुनिश्चित करने, सरकारी देरी की स्थिति में वैधानिक ब्याज देने तथा जीएसटी रिटर्न, श्रम कानूनों और स्थानीय नियमों से जुड़ी प्रक्रियात्मक चूकों के पूर्ण अपराधमुक्तिकरण की मांग की है।
निर्यातोन्मुख इकाइयों के लिए संघ ने अचानक टैरिफ वृद्धि से प्रभावित छोटे निर्यातकों की भरपाई हेतु ‘निर्यात जोखिम समानीकरण कोष’ के गठन का प्रस्ताव रखा है। साथ ही सिडबी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा एमएसई को दिए जाने वाले ऋण लक्ष्यों में वृद्धि की भी मांग की गई है।
पत्र में सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल के माध्यम से टेंडर जमा करने वाली एमएसई इकाइयों के लिए शुल्क कम करने और विलंबित भुगतान मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए राज्य सुविधा परिषदों की कार्यप्रणाली को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है। FACSI ने कहा कि कुछ सुझावों के लिए एमएसएमईडी अधिनियम, 2006 में संशोधन जरूरी होगा।
इसके अलावा, संघ ने नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्रों, बिजली शुल्क और स्थानीय करों पर सब्सिडी देने के लिए राज्य सरकारों के साथ बेहतर समन्वय तथा राज्य औद्योगिक विकास निगमों द्वारा संचालित औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित इकाइयों को विशेष सुविधाएं प्रदान करने की आवश्यकता पर बल दिया।
गुहा ने कहा, “ये उपाय भारत में सूक्ष्म और लघु उद्यमों की वृद्धि के लिए एक मजबूत आधार साबित होंगे।”
पीटीआई
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