
तिरुवनंतपुरम, 9 जनवरी (PTI) — बांग्लादेशी-स्वीडिश लेखिका तसलीमा नसरीन ने शुक्रवार को बांग्लादेश सरकार पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि देश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने “धार्मिक कट्टरपंथियों के साथ गठजोड़ कर लिया है और विभाजनकारी ताकतों को मजबूत किया है।”
यह टिप्पणी उन्होंने यहां केरल विधानसभा अंतरराष्ट्रीय पुस्तक महोत्सव (KLIBF) के चौथे संस्करण में ‘बुक फॉर पीस’ विषय पर बोलते हुए की। नसरीन ने आरोप लगाया कि नोबेल शांति पुरस्कार विजेता यूनुस ऐसे एजेंडों को बढ़ावा दे रहे हैं, जो बांग्लादेश की धर्मनिरपेक्षता और आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए खतरा हैं।
उन्होंने कहा कि जब “कुछ धार्मिक उन्मादी और कट्टरपंथी तत्वों” ने उनकी पुस्तकों को लेकर उन्हें जान से मारने की धमकियां दीं और उनके खिलाफ फतवे जारी किए, तब तत्कालीन बांग्लादेश सरकार ने उन तत्वों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। इसके उलट, सरकार ने उनके खिलाफ ही गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया।
“अगर उस समय सरकार ने कट्टरपंथियों और जिहादियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की होती, तो आज बांग्लादेश की स्थिति इतनी खराब नहीं होती,” नसरीन ने कहा।
उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में बने रहने के लिए सरकार ने धर्म का राजनीतिक इस्तेमाल किया और चरमपंथी ताकतों को बढ़ावा दिया।
तसलीमा नसरीन ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने धर्मनिरपेक्ष शिक्षण संस्थानों और विज्ञान अकादमियों के बजाय धार्मिक स्कूलों की स्थापना की, ताकि कट्टरपंथियों का समर्थन हासिल कर सत्ता में लंबे समय तक बनी रह सके।
देश में मौजूदा संकट के लिए अंतरिम सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए उन्होंने कहा,
“आज कट्टरपंथी ताकतें सत्ता के करीब हैं और डॉ. यूनुस उन्हें समर्थन दे रहे हैं। ऐसे में यह समझना मुश्किल है कि वह धर्मनिरपेक्ष बांग्लादेश, जिसने 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ संघर्ष किया था, दोबारा कैसे लौटेगा।”
उन्होंने कहा कि आज बांग्लादेश गहराई से विभाजित हो चुका है और मुस्लिम चरमपंथी धार्मिक अल्पसंख्यकों की हत्या और उत्पीड़न कर रहे हैं।
“इसे तुरंत रोका जाना चाहिए,” नसरीन ने जोर देते हुए कहा।
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