
ढाका, 10 फरवरी (PTI) बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने सोमवार देर रात लोगों से 12 फरवरी को आम चुनावों के साथ-साथ होने वाले जनमत संग्रह में ‘हाँ’ के पक्ष में मतदान करने और अपने प्रस्तावित सुधार पैकेज का समर्थन करने की जोरदार अपील की।
उन्होंने कहा, “यदि जनमत संग्रह में ‘हाँ’ का पक्ष जीतता है, तो बांग्लादेश का भविष्य अधिक सकारात्मक दिशा में बनेगा।” यूनुस यह बात वरिष्ठ सचिवों और शीर्ष नौकरशाहों को संबोधित करते हुए कही। चुनाव कानूनों के अनुसार मतदान से 48 घंटे पहले, यानी आधी रात 12 बजे, चुनाव प्रचार समाप्त हो गया।
यूनुस ने कहा कि ‘हाँ’ के पक्ष में जनमत “कुशासन” को दूर रखेगा। उनकी सरकार पिछले कई हफ्तों से 84 बिंदुओं वाले जटिल सुधार पैकेज के लिए जनसमर्थन जुटाने के लिए सक्रिय रूप से प्रचार कर रही थी।
बांग्लादेश बैंक के आदेश के अनुरूप, वाणिज्यिक बैंकों ने भी सरकारी कार्यालयों में ‘हाँ’ वोट के समर्थन वाले बैनर लगाए। केंद्रीय बैंक ने बैंकों से जनमत संग्रह के समर्थन में गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के अभियानों के लिए अपने कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) फंड का उपयोग करने को भी कहा।
जो सरकारी अधिकारी चुनाव प्रक्रिया में शामिल होने वाले थे, वे 29 जनवरी तक प्रचार करते रहे, जब चुनाव आयोग ने सरकारी अधिकारियों को ऐसे किसी भी प्रचार में शामिल होने से सख्ती से रोकते हुए इसे “दंडनीय अपराध” करार दिया।
कई कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि चूंकि जनमत संग्रह में मतदाताओं से केवल “हाँ” या “नहीं” में से एक चुनने को कहा गया है, इसलिए अंतरिम सरकार से निष्पक्ष रुख अपनाने की अपेक्षा थी, न कि खुले तौर पर पक्षपाती भूमिका निभाने की, खासकर जब इसमें बड़ी मात्रा में सार्वजनिक धन खर्च हो रहा है।
कुछ विधि विशेषज्ञों ने जनमत संग्रह की वैधता पर भी सवाल उठाया, क्योंकि बांग्लादेश के संविधान में ऐसे किसी जनमत संग्रह का प्रावधान नहीं है।
यह जनमत संग्रह “जुलाई राष्ट्रीय चार्टर-2025” नामक सुधार प्रस्तावों पर जनता की सहमति लेने के लिए कराया जा रहा है, जिसकी घोषणा यूनुस ने 17 अक्टूबर को राजनीतिक दलों और उनके नेतृत्व वाले राष्ट्रीय सहमति आयोग के बीच लंबी चर्चा के बाद एक भव्य समारोह में की थी।
चार्टर की घोषणा करते हुए यूनुस ने कहा था कि यह “बर्बरता से सभ्य समाज की ओर बढ़ने” का प्रयास है।
पिछले महीने राष्ट्र के नाम संबोधन में भी यूनुस ने अपनी सरकार के सुधार पैकेज के लिए ‘हाँ’ वोट की अपील की थी।
जनमत संग्रह के मतपत्र में जुलाई चार्टर के चार प्रमुख सुधार क्षेत्रों से जुड़ा एक ही सवाल है। मतदाताओं को निर्देश दिया गया है कि यदि वे प्रस्तावों से अधिक सहमत हैं तो ‘हाँ’ और असहमति होने पर ‘नहीं’ में मतदान करें।
हालांकि, आलोचकों का कहना है कि चार्टर में कई जटिल सुधार शामिल हैं, इसलिए यह जनमत संग्रह शिक्षित मतदाताओं के लिए भी मुश्किल हो सकता है, क्योंकि वे कुछ सुधारों का समर्थन कर सकते हैं और कुछ का विरोध।
आलोचकों के अनुसार, यह जनमत संग्रह अगली सरकार को चार्टर लागू करने के लिए बाध्य करने और यूनुस-नेतृत्व वाली सरकार को वैधता देने का भी प्रयास है। यह सरकार छात्र-नेतृत्व वाले सड़क आंदोलन — जिसे ‘जुलाई विद्रोह’ कहा गया — के बाद सत्ता में आई थी, जिसने 5 अगस्त 2026 को तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग सरकार को गिरा दिया था।
अंतरिम सरकार ने इस प्रस्ताव पर राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के हस्ताक्षर भी कराए और बाद में इस संबंध में आधिकारिक गजट जारी किया।
हालांकि, कई कानूनी विशेषज्ञों ने स्वयं जनमत संग्रह की वैधता पर सवाल उठाए। प्रमुख विधिवेत्ता स्वाधीन मलिक ने कहा, “जुलाई चार्टर में लिए गए अधिकांश फैसले, जिनमें गजट में शामिल निर्णय भी हैं, वर्तमान संविधान के विपरीत हैं।”
उन्होंने कहा कि जब संविधान अभी भी लागू है, तो राष्ट्रपति कानूनी रूप से इस गजट पर हस्ताक्षर नहीं कर सकते थे। यह तभी स्वीकार्य होता, यदि संविधान को रद्द या मार्शल लॉ के तहत निलंबित किया गया होता।
“चूंकि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है, इसलिए सभी प्रक्रियाएं मौजूदा संविधान के अनुसार ही चलनी चाहिए,” मलिक ने कहा।
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