बारिश ने हिमाचल, उत्तराखंड में मचाई तबाही; दो हफ्तों में 45 की मौत, कई लापता

Gurugram: A traffic police personnel regulates vehicular movement on a road amid rain, in Gurugram, Friday, July 4, 2025. (PTI Photo)(PTI07_04_2025_000252B)

नई दिल्ली, 4 जुलाई (भाषा) — देश के कुछ हिस्सों में भारी बारिश ने तबाही मचा दी है, जहां पिछले दो हफ्तों में हिमाचल प्रदेश में 43 लोगों की मौत हो गई है और 37 लोग लापता हैं। इसके अलावा, उत्तराखंड के भीमताल में गुरुवार को भारतीय वायुसेना (IAF) के दो जवान झील में डूब गए।

ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में भी हालात खराब हैं, जहां कई निचले इलाकों में शुक्रवार को भी जलभराव बना रहा। भुवनेश्वर नगर निगम (BMC) को जल निकासी में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा क्योंकि ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह फेल हो गया।

मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में शुक्रवार को भारी बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य के पूर्वी जिलों — मण्डला, सिवनी और बालाघाट — के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। पिछले 24 घंटे में 27 से अधिक जिलों में बारिश दर्ज की गई है।

बारिश के कारण जबलपुर और मण्डला को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर भूस्खलन हुआ, जिससे यातायात बाधित हो गया।

हिमाचल प्रदेश में मानसून 20 जून को आया था और अब तक राज्य को बादल फटने, अचानक बाढ़ और भूस्खलन के कारण लगभग ₹5,000 करोड़ का नुकसान हुआ है।

हिमाचल में मारे गए 43 लोगों में से 14 की मौत बादल फटने से, 8 की बाढ़ से, 1 की भूस्खलन से और 7 की डूबने से हुई। सबसे ज्यादा 17 मौतें मंडी जिले में हुईं, जहां मंगलवार को 10 से अधिक बादल फटने, बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं हुईं।

मंडी जिले से 31 लोग अब भी लापता हैं, जिनकी तलाश जारी है।

शुक्रवार को राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) के जवानों ने भारी बारिश के बाद भराड़, देजी, पायला और रुकचुई गांवों से 65 लोगों को बचाया।

भारी बारिश और भूस्खलन के कारण सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं और नदियों का जलस्तर बढ़ गया, जिससे कई गांव कट गए और घरों व खेतों में मलबा भर गया।

150 से अधिक मकान, 106 पशुशालाएं, 31 वाहन, 14 पुल और कई सड़कें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। वहीं, 164 मवेशियों की मौत हुई है।

402 लोगों को राहत शिविरों में शरण दी गई है, जिनमें से 348 मंडी जिले से हैं।

राज्य आपात संचालन केंद्र (SEOC) के अनुसार, राज्य में 280 सड़कें बंद हो चुकी हैं, जिनमें मंडी की 156, सिरमौर की 49 और कुल्लू की 36 सड़कें शामिल हैं। इसके अलावा 332 ट्रांसफार्मर और 784 जलापूर्ति योजनाएं बाधित हैं।

स्थानीय मौसम विभाग ने शनिवार से मंगलवार तक भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी देते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

उत्तराखंड में भी लगातार बारिश से जनजीवन प्रभावित हो रहा है। गुरुवार को भीमताल झील में वायुसेना के दो जवान डूब गए।

पठानकोट (पंजाब) के 22 वर्षीय प्रिंस यादव और मुजफ्फरपुर (बिहार) के 23 वर्षीय साहिल कुमार आठ वायुसेना कर्मियों (जिनमें चार महिलाएं भी थीं) के समूह के साथ नैनीताल में छुट्टियां मना रहे थे। पुलिस सर्कल अधिकारी प्रमोद शाह ने बताया कि स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद दोनों के शव निकाले गए।

राज्य में 100 से अधिक सड़कें बंद हैं, जिससे चारधाम यात्रा बाधित हो गई है। उत्तरकाशी जिले के गीत क्षेत्र के कुछ गांवों में खाद्यान्न की कमी हो गई है।

गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से फोन पर बात कर राज्य के आपदा प्रभावित जिलों की स्थिति की जानकारी ली। धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर बताया कि गृह मंत्री ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि केंद्र सरकार की आपात एजेंसियों — NDRF और ITBP — को तत्काल तैनात किया जा रहा है ताकि चारधाम यात्रा निर्बाध रूप से चल सके और यात्रियों को कोई असुविधा न हो।

पूर्वी भारत के भुवनेश्वर में जलभराव जारी है। BMC आयुक्त राजेश प्रभाकर पाटिल ने लक्ष्मीसागर और बड़ागड़ा जैसे इलाकों का दौरा किया और कर्मचारियों को पानी निकासी का काम युद्धस्तर पर करने का निर्देश दिया।

कुछ राहत भरी खबर पूर्वोत्तर भारत से आई है, जहां त्रिपुरा, मिजोरम, मणिपुर और असम के बराक घाटी को जोड़ने वाली रेल सेवाएं शुक्रवार को बहाल हो गईं। गुरुवार को दीमा हसाओ जिले में भूस्खलन के कारण सेवाएं बाधित हो गई थीं।

पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) के बयान के अनुसार, लमडिंग-बदरपुर सेक्शन में शुक्रवार सुबह सेवाएं फिर से शुरू हो गईं। मलबा हटाने का काम पूरी रात चलता रहा, जिसके बाद ट्रैक को सुरक्षित घोषित किया गया।

दिल्ली में शुक्रवार को आसमान में बादल छाए रहे और हल्की बारिश हुई। मौसम विभाग ने राष्ट्रीय राजधानी के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

राष्ट्रीय प्राणी उद्यान (चिड़ियाघर) ने बारिश के दौरान जानवरों की सुरक्षा और बाड़ों में जलभराव से बचाव के लिए कर्मचारी तैयारियों को बढ़ा दिया है, इंफ्रास्ट्रक्चर की मरम्मत शुरू की है, नए वाटर पंप मंगवाए हैं और हल्दी, नीम तेल जैसे पारंपरिक उपाय अपनाए हैं।

पिछले साल बारिश के कारण चिड़ियाघर के कई बाड़ों में जलभराव और ट्रांसफार्मर में पानी घुसने से लंबी बिजली कटौती हुई थी।

राजस्थान के जैसलमेर जिले के पोखरण में शुक्रवार को दक्षिण-पश्चिम मानसून के प्रभाव से 128 मिमी बारिश दर्ज की गई, हालांकि राज्य के कुछ हिस्सों में अब भी गर्मी बनी हुई है। पश्चिमी राजस्थान के कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की गई है।
(पीटीआई टीम)

श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़
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