नई दिल्ली, 28 जनवरी (पीटीआई)
भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने बुधवार को सुझाव दिया कि आगामी बजट को दीर्घकालिक दृष्टि के साथ जोड़ा जाना चाहिए, ताकि भारतीय अर्थव्यवस्था को अधिक सुदृढ़ और आत्मनिर्भर बनाया जा सके तथा विकास को तेज किया जा सके, क्योंकि दुनिया इस समय “अत्यंत खतरनाक दौर” से गुजर रही है।
पीटीआई वीडियो को दिए एक साक्षात्कार में राजन ने कहा कि पहले भारत में पंचवर्षीय योजनाएं होती थीं, लेकिन तब भी बजट उनके साथ अच्छी तरह से एकीकृत नहीं होता था।
उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि (2026-27 का केंद्रीय बजट) इसे एक दीर्घकालिक दृष्टि के साथ जोड़ा जाना चाहिए। हम एक अर्थव्यवस्था के रूप में कैसे अधिक सुदृढ़, अधिक स्वतंत्र और साथ ही तेज़ी से बढ़ने वाले बनें, ताकि बाकी दुनिया भारत के साथ दोस्ती करना चाहे — इसके लिए काफी काम की ज़रूरत है। मुझे उम्मीद है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का अगला बजट हमें उस दिशा में ले जाएगा।”
सीतारमण 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश करेंगी, जिसमें अस्थिर भू-राजनीतिक हालात के बीच आर्थिक विकास को मज़बूत करने के लिए सुधारात्मक उपाय शामिल होने की उम्मीद है।
राजन ने कहा कि यह समय वैश्विक और भारतीय अर्थव्यवस्था दोनों के लिए “अत्यंत खतरनाक” है, भले ही “कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) में भारी निवेश से कई सकारात्मक अवसर भी दिख रहे हों।”
उन्होंने कहा, “लेकिन यह खतरा भी है कि हम ऐसे संस्थानों पर बहुत अधिक निर्भर हो जाएं, जो हमें दबाव में ला सकते हैं और कमजोर बना सकते हैं, क्योंकि हमारे पास ऐसा कोई स्वाभाविक, पास का और समृद्ध बाज़ार नहीं है, जिसे हम अपने अलावा आपूर्ति कर सकें।”
शिकागो बूथ में वित्त के प्रोफेसर रघुराम राजन ने कहा कि उन्हें समझ है कि आगामी बजट में कुछ टैरिफ दरों में कटौती की जा सकती है, जो भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में बेहतर तरीके से जुड़ने में मदद कर सकती हैं।
उन्होंने कहा, “राज्य सरकारें भी निवेश के अनुकूल नीतियां बनाकर मदद कर रही हैं, लेकिन हमें इससे कहीं अधिक करने की ज़रूरत है।”
भारत को सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बताते हुए राजन ने कहा कि यह जश्न मनाने की बात है, लेकिन साथ ही “हमें जितने अधिक संबंध बना सकें, बनाने चाहिए — अपने पड़ोसियों बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल के साथ भी।”
यदि अमेरिका के साथ व्यापार तनाव और बढ़ता है, तो भारत किस तरह घरेलू सुधारों और बाहरी रणनीति के ज़रिये झटकों को सह सकता है — इस सवाल पर राजन ने कहा कि सबसे ज़रूरी है कि भारत कुछ समय के लिए बाहरी शोर से दूरी बनाए और आत्ममंथन करे कि विकास दर बढ़ाने के लिए उसे क्या करना चाहिए।
उन्होंने कहा, “1990 के दशक से लेकर 2000 के शुरुआती वर्षों तक हमने कई बड़े सुधार किए थे, फिर कुछ समय तक बहुत कम हुआ। अब उस प्रक्रिया को फिर से शुरू करने का समय आ गया है।”
राजन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने हाल के वर्षों में सुधार लागू किए हैं, लेकिन अब यह सोचने का समय है कि भारत की आर्थिक विकास दर में शायद दो प्रतिशत अंक और कैसे जोड़े जाएं।
उन्होंने कहा, “दो बड़ी महाशक्तियों की नीतिगत अनिश्चितताओं से एक अवसर पैदा हुआ है — वैश्विक सप्लाई चेन में खुद को फिर से स्थापित करने का।”
राजन ने बताया कि भारत स्वाभाविक रूप से किसी भी वैश्विक सप्लाई चेन का हिस्सा नहीं है, क्योंकि वह किसी बड़े आर्थिक केंद्र के पास नहीं है, सिवाय चीन के, जिसके साथ उसका सीमा विवाद है।
उन्होंने कहा, “आगे बढ़ते हुए भारत के लिए ज़रूरी होगा कि वह अपनी सप्लाई चेन को विविध बनाए — चीन के साथ भी, लेकिन विशेष रूप से यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, मध्य पूर्व और पूर्वी एशियाई देशों के साथ।”
राजन ने कहा कि महाशक्तियों द्वारा पैदा की गई तमाम अनिश्चितताओं के बीच भारत को एक नया मौका मिला है — “वह बस पकड़ने का, जिसे शायद वह पहले चूक गया था।”
उन्होंने कहा, “यह सिर्फ विनिर्माण नहीं है, सेवाएं भी हैं — और हर तरह की सेवाएं। क्या हम इस पर गंभीरता से सोचना शुरू कर सकते हैं?”
उनके अनुसार, यदि भारत सुधारों का एक ठोस पैकेज पेश कर पाता है, तो न केवल विदेशी निवेश बढ़ेगा, बल्कि देश वैश्विक सप्लाई चेन में भी गहराई से जुड़ जाएगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया है, जिसमें रूसी तेल की खरीद पर 25 प्रतिशत शुल्क भी शामिल है, जिससे दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में तनाव आया है।
क्या भारत चीन और पूर्वी एशियाई देशों की तरह लंबे समय तक 8-9 प्रतिशत की दर से विकास कर सकता है — इस सवाल पर राजन ने कहा कि भारत को चीन जैसी बेतहाशा रफ्तार से बढ़ने की ज़रूरत नहीं है।
उन्होंने कहा, “उस विकास का कुछ हिस्सा अस्थिर था, और अब हम चीनी संपत्ति बाजार की समस्याएं देख रहे हैं, जिन्हें ठीक होने में वर्षों लगेंगे।”
राजन ने कहा कि भारत में भी कुछ बुनियादी ढांचे का निर्माण चिंता पैदा कर रहा है।
उन्होंने कहा, “हर शहर मेट्रो चाहता है, लेकिन हर शहर में मेट्रो स्टेशनों को सही जगह पर लगाने की क्षमता नहीं है। ऐसे कुछ निवेश लंबे समय में वसूल नहीं हो पाएंगे। हमें ऐसा सार्वजनिक ढांचा नहीं बनाना चाहिए, जिसका लोग उपयोग ही न कर सकें।”
राजन ने जोर देकर कहा कि भारत को अस्थायी और अस्थिर विकास से सावधान रहना होगा।
उन्होंने कहा, “इसमें आवास भी शामिल है। भले ही हम एक गरीब देश हों और बहुत से लोगों के पास घर न हों, लेकिन हर तरह का आवास प्रभावी ढंग से उपयोग में नहीं आ सकता। इसलिए हमें बेतरतीब विकास से बचना होगा।”
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