भारतीय मूल के खगोलशास्त्री को यूके की रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी का गोल्ड मेडल

Professor Shrinivas Kulkarni

लंदन, 12 जनवरी (पीटीआई) अमेरिका में कार्यरत भारतीय मूल के खगोलशास्त्री प्रोफेसर श्रीनिवास कुलकर्णी को टाइम-डोमेन खगोलशास्त्र में उनके “क्षेत्र-परिभाषित” योगदान के लिए लंदन स्थित रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी (आरएएस) के प्रतिष्ठित गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया है।

महाराष्ट्र में जन्मे कुलकर्णी कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (कैलटेक) में जॉर्ज एलेरी हेल प्रोफेसर ऑफ एस्ट्रोनॉमी एंड प्लैनेटरी साइंस हैं। उन्होंने ब्राउन ड्वार्फ से लेकर दूरस्थ गामा-रे फटने जैसी अनेक खगोलीय घटनाओं की खोज की है।

पिछले सप्ताह जारी आरएएस गोल्ड मेडल के प्रशस्ति पत्र में मल्टी-वेवलेंथ ट्रांज़िएंट एस्ट्रोफिज़िक्स में उनके “लगातार, नवोन्मेषी और क्रांतिकारी योगदान” को मान्यता दी गई है।

1824 से हर साल दिए जाने वाले इस सर्वोच्च सम्मान को प्राप्त कर कुलकर्णी स्टीफन हॉकिंग, जोसलिन बेल बर्नेल, अल्बर्ट आइंस्टीन और एडविन हबल जैसे महान वैज्ञानिकों की श्रेणी में शामिल हो गए हैं।

कुलकर्णी ने कहा, “यह खबर सुनकर मैं बेहद हैरान था, खासकर पिछले विजेताओं की शानदार सूची को देखते हुए।”

उन्होंने अपने दीर्घकालिक सहयोगियों तथा पालोमार ट्रांज़िएंट फैक्ट्री और ज़्विकी ट्रांज़िएंट फैसिलिटी की इंजीनियरिंग टीम का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने पहली मिलीसेकंड पल्सर की खोज को “अपने जीवन की सबसे रोमांचक उपलब्धि” बताते हुए कहा, “मैं उस समय स्नातक छात्र था और कई दिनों तक सो नहीं सका।”

कुलकर्णी, जिन्हें हाल ही में 2024 का शॉ प्राइज़ (खगोलशास्त्र) भी मिला है, 1985 में कैलटेक से जुड़े थे। 1997 में उन्होंने यह सिद्ध किया कि शक्तिशाली गामा-रे विस्फोट हमारी आकाशगंगा के बाहर से आते हैं।

उन्होंने पालोमार ट्रांज़िएंट फैक्ट्री (पीटीएफ) और इसके उत्तराधिकारी ज़्विकी ट्रांज़िएंट फैसिलिटी (ज़ीटीएफ) के विकास का नेतृत्व किया, जिनकी मदद से वास्तविक समय में हजारों ब्रह्मांडीय घटनाओं का पता लगाया गया। कैलटेक के पालोमार वेधशाला में स्थित ज़ीटीएफ आज भी सक्रिय है और हर दो रात में पूरे उत्तरी आकाश का सर्वेक्षण करता है।

आरएएस के अनुसार, इन परियोजनाओं ने ऑप्टिकल तरंगदैर्घ्य में टाइम-डोमेन खगोलशास्त्र में क्रांति ला दी है।

अपने 2024 के वॉटसन व्याख्यान में कुलकर्णी ने खगोलशास्त्र में नए क्षेत्रों की खोज के लिए उपकरण विकसित करने के अपने जुनून पर बात की। अपने करियर में वे अब तक 10 वैज्ञानिक उपकरण बना चुके हैं।

वर्तमान में वे नासा के अल्ट्रावायलेट एक्सप्लोरर (यूवीईएक्स) मिशन के विकास से जुड़े हैं, जिसका प्रक्षेपण 2030 में प्रस्तावित है। यह मिशन अब तक का सबसे संवेदनशील पराबैंगनी आकाश सर्वेक्षण करेगा। वे हवाई स्थित डब्ल्यू.एम. केक वेधशाला के लिए विकसित हो रहे शक्तिशाली स्पेक्ट्रोमीटर ‘ज़ी-शूटर’ के प्रधान अन्वेषक भी हैं।

कुलकर्णी ने 1978 में आईआईटी दिल्ली से मास्टर्स, 1983 में यूसी बर्कले से पीएचडी की और पिछले चार दशकों से कैलटेक में कार्यरत हैं।

श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़

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