नई दिल्ली, 9 फरवरी (पीटीआई)
सरकार ने सोमवार को कहा कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के तहत भारत ऑटोमोबाइल क्षेत्र में कोटा आधारित सीमा शुल्क रियायतें देगा, जबकि शराब (अल्कोहलिक बेवरेजेज) के लिए टैरिफ में कटौती और न्यूनतम आयात मूल्य (एमआईपी) आधारित व्यवस्था के तहत बाजार पहुंच की पेशकश की गई है।
सरकार ने कहा कि इस समझौते के तहत भारत के 30.94 अरब अमेरिकी डॉलर के निर्यात पर लगने वाला टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किया जाएगा, जबकि अन्य 10.03 अरब अमेरिकी डॉलर के निर्यात पर लगाए गए पारस्परिक शुल्क पूरी तरह समाप्त कर दिए जाएंगे।
“इसका मतलब है कि अमेरिकी बाजार में प्रवेश करने वाले भारतीय उत्पादों का बड़ा हिस्सा या तो काफी कम शुल्क का सामना करेगा या पूरी तरह शुल्क-मुक्त होगा, जिससे उनकी मूल्य प्रतिस्पर्धा में उल्लेखनीय सुधार होगा,” सरकार ने कहा।
सरकार ने बताया कि भारत के 1.36 अरब अमेरिकी डॉलर के कृषि निर्यात को अमेरिका में शून्य अतिरिक्त शुल्क की सुविधा मिलेगी। इसमें मसाले, चाय, कॉफी, फल, मेवे और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद शामिल हैं।
संवेदनशील क्षेत्रों जैसे ऑटोमोबाइल को कोटा और शुल्क कटौती के संयोजन के माध्यम से उदार बनाया गया है।
एक अधिकारी के अनुसार, भारत अमेरिका को इलेक्ट्रिक वाहनों पर कोई शुल्क रियायत नहीं दे रहा है।
चिकित्सा उपकरणों के मामले में लंबे और चरणबद्ध कार्यान्वयन कार्यक्रम अपनाए गए हैं, जबकि कीमती धातुओं और अन्य संवेदनशील औद्योगिक उत्पादों के लिए कोटा आधारित टैरिफ कटौती का प्रावधान किया गया है।
“शराब को अन्य मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) में अपनाई गई भारत की नीति के अनुरूप, टैरिफ कटौती और न्यूनतम आयात मूल्य आधारित व्यवस्था के तहत पेश किया गया है,” सरकार ने कहा।
भारत के लिए क्षेत्रवार लाभ
सरकार ने कहा कि कपड़ा निर्यात पर टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किया जाएगा, जबकि रेशम को शून्य शुल्क की सुविधा मिलेगी। इससे 113 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के अमेरिकी बाजार में नए अवसर खुलेंगे।
इसी तरह, घरेलू रत्न एवं आभूषण क्षेत्र के लिए भी टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत किया जाएगा, जिससे 61 अरब अमेरिकी डॉलर के अमेरिकी बाजार में तरजीही पहुंच मिलेगी।
इसके अलावा, हीरे, प्लेटिनम और सिक्कों सहित प्रमुख उत्पाद श्रेणियों के लिए 0 प्रतिशत शुल्क बाजार पहुंच सुनिश्चित की गई है, जो 29 अरब अमेरिकी डॉलर के अमेरिकी बाजार को कवर करती है।
लाभान्वित होने वाले प्रमुख निर्यात उत्पादों में कटे-पॉलिश किए हुए हीरे, लैब-ग्रोन सिंथेटिक हीरे, रंगीन रत्न, सिंथेटिक पत्थर तथा सोने, चांदी और प्लेटिनम से बने उत्पाद शामिल हैं।
कृषि क्षेत्र
सरकार ने कहा कि भारत का अमेरिका के साथ कृषि व्यापार में 1.3 अरब अमेरिकी डॉलर का व्यापार अधिशेष है। वर्ष 2024 में भारत का कृषि निर्यात 3.4 अरब अमेरिकी डॉलर और आयात 2.1 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।
अमेरिका 1.36 अरब अमेरिकी डॉलर के भारतीय कृषि निर्यात पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाएगा।
लाभ पाने वाले उत्पादों में मसाले; चाय और कॉफी; खोपरा और नारियल तेल; काजू और चेस्टनट जैसे मेवे; एवोकाडो, केला, अमरूद, आम, कीवी, पपीता, अनानास जैसे फल और मशरूम शामिल हैं।
इसके अलावा जौ और कैनरी सीड्स जैसे अनाज; बेकरी उत्पाद; कोको और कोको उत्पाद; तिल और खसखस के बीज; तथा फलों का गूदा, जूस और जैम जैसे प्रसंस्कृत उत्पाद भी लाभान्वित होंगे।
भारत की पिछली व्यापार संधियों की नीति के अनुरूप, कृषि बाजार पहुंच को उत्पादों की संवेदनशीलता के आधार पर संरचित किया गया है।
इसमें तत्काल शुल्क समाप्ति, चरणबद्ध समाप्ति (10 वर्षों तक), टैरिफ कटौती, प्राथमिकता मार्जिन और टैरिफ रेट कोटा (टीआरक्यू) जैसे प्रावधान शामिल हैं।
अत्यधिक संवेदनशील कृषि क्षेत्र—जैसे मांस, पोल्ट्री और डेयरी उत्पाद; जीएम खाद्य पदार्थ; सोयामील; मक्का और अन्य अनाज—पूरी तरह संरक्षित रहेंगे।
कुछ चुनिंदा संवेदनशील कृषि उत्पादों पर सीमित शुल्क कटौती लागू की गई है, ताकि उचित स्तर की सुरक्षा बनी रहे।
इनमें पौधों के हिस्से, जैतून, पाइरेथ्रम और ऑयल केक शामिल हैं।
कुछ अत्यधिक संवेदनशील उत्पादों को टैरिफ रेट कोटा के तहत उदार बनाया गया है, जिनमें सीमित मात्रा में कम शुल्क पर आयात की अनुमति होगी।
इस श्रेणी में इन-शेल बादाम, अखरोट, पिस्ता और मसूर शामिल हैं।
औद्योगिक वस्तुएं
समझौते के तहत 38 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के औद्योगिक निर्यात को शून्य अतिरिक्त शुल्क की सुविधा मिलेगी।
भारत को रत्न-हीरे, प्लेटिनम और सिक्के, घड़ियां, आवश्यक तेल, अकार्बनिक रसायन, कागज, प्लास्टिक और लकड़ी से बने उत्पाद तथा प्राकृतिक रबर जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में शून्य पारस्परिक शुल्क का लाभ मिलेगा।
वहीं, अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं के लिए भारत में बाजार पहुंच को उत्पाद संवेदनशीलता के आधार पर ही संरचित किया गया है, जिसमें तत्काल शुल्क समाप्ति, चरणबद्ध कटौती (10 वर्ष तक) और कोटा आधारित पहुंच शामिल है।
डिजिटल व्यापार
वर्ष 2024 में भारत की डिजिटल रूप से वितरित सेवाओं का निर्यात 0.28 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, जिसमें सालाना 10.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
भारत डिजिटल सेवाओं के वैश्विक निर्यात में 5वें और आयात में 11वें स्थान पर है, जबकि अमेरिका दोनों में पहले स्थान पर है।
“दोनों देशों के बीच एक संरचित डिजिटल व्यापार ढांचा नियामकीय अनिश्चितता को कम करेगा, अनुपालन से जुड़ी बाधाओं को घटाएगा और सीमा-पार सेवा आपूर्ति को सुगम बनाएगा,” सरकार ने कहा।

