भारत–ईयू समझौते को ‘महाशक्तियों’ के एकजुट होने का अवसर मानते हैं मर्ज़

Ahmedabad: Prime Minister Narendra Modi looks on as German Chancellor Friedrich Merz writes in the visitor's book during their visit to Sabarmati Ashram, in Ahmedabad, Monday, Jan. 12, 2026. (PTI Photo)(PTI01_12_2026_000074B)

दावोस, 22 जनवरी (पीटीआई) भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर से कुछ दिन पहले जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने गुरुवार को कहा कि “महाशक्तियों का युग” उन देशों के लिए एक अवसर है, जो संरक्षणवाद और अलगाववाद के खिलाफ नियम-आधारित व्यवस्था का समर्थन करते हैं और मिलकर आगे बढ़ना चाहते हैं।

विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक में एक विशेष संबोधन में चांसलर ने कहा कि वह यूरोप में उच्च आर्थिक वृद्धि चाहते हैं और इसे हासिल करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि कुछ ही दिनों में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष भारत जाएंगी, जहां उपमहाद्वीप और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते के सिद्धांत तय किए जाएंगे।

मर्ज़ ने कहा कि वह एक सप्ताह पहले भारत में थे और उन्हें कोई संदेह नहीं है कि महाशक्तियों का यह दौर उन सभी देशों के लिए अवसर लेकर आया है, जो मनमाने शासन की बजाय नियमों को प्राथमिकता देते हैं और संरक्षणवाद व अलगाववाद के बजाय मुक्त व्यापार में लाभ देखते हैं। उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ इस दिशा में नए साझेदारों के साथ मिलकर काम कर रहा है।

उन्होंने मेक्सिको और इंडोनेशिया के साथ व्यापार समझौतों को अंतिम रूप देने के प्रयासों का भी उल्लेख किया।

मंगलवार को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डर लेयेन ने यहां कहा था कि यूरोपीय संघ भारत के साथ एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने के बेहद करीब है, जिसे ‘सभी सौदों की जननी’ कहा जा रहा है। यह समझौता करीब 2 अरब लोगों का बाजार तैयार करेगा, जो वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का लगभग एक-चौथाई होगा।

उन्होंने कहा कि यह समझौता यूरोप को दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते और गतिशील क्षेत्रों में से एक के साथ पहले कदम रखने का लाभ देगा। उन्होंने कहा, “यूरोप आज के विकास केंद्रों और इस सदी की आर्थिक शक्तियों के साथ व्यापार करना चाहता है।”

यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा और वॉन डर लेयेन 25 से 27 जनवरी तक भारत में रहेंगे। वे गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ शिखर वार्ता करेंगे।

दोनों पक्ष 27 जनवरी को होने वाले भारत–ईयू शिखर सम्मेलन में बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते पर वार्ताओं के समापन की घोषणा करने वाले हैं।

यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वित्त वर्ष 2023-24 में दोनों के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार 135 अरब अमेरिकी डॉलर दर्ज किया गया। इस मुक्त व्यापार समझौते से व्यापारिक संबंधों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की उम्मीद है।

यह प्रस्तावित समझौता ऐसे समय में विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को गहराई देने में गुणात्मक बदलाव लाने की उम्मीद है, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शुल्क नीति के कारण वैश्विक व्यापार में बाधाएं देखने को मिल रही हैं।

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