भारत का यूएन सुरक्षा परिषद को दो टूक संदेश: सीमापार आतंकवाद और हथियारों की तस्करी क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा

**EDS: SCREENSHOT VIA PTI VIDEOS** New York: Permanent Representative of India to the United Nations, Parvathaneni Harish delivers India's statement at the UN Security Council Open Debate on Women, Peace and Security, in New York, USA, Tuesday, Oct. 7, 2025. (PTI Photo)(PTI10_07_2025_000008B)

संयुक्त राष्ट्र, 11 नवम्बर (पीटीआई) — भारत के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि परवथनेनी हरीश ने सोमवार को कहा कि भारत को सीमापार आतंकवाद का सामना करना पड़ा है, जिसमें अवैध रूप से तस्करी किए गए हथियारों का इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने अपने बयान में पाकिस्तान का नाम तो नहीं लिया, लेकिन इशारा उसी ओर था।

हरीश ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ‘स्मॉल आर्म्स’ पर खुले विचार-विमर्श बैठक में कहा कि सुरक्षा परिषद को ऐसे सभी तत्वों के प्रति शून्य-सहनशीलता का रुख अपनाना चाहिए, जो इस तरह के हथियारों के इस्तेमाल और आवाजाही को प्रोत्साहित या समर्थन करते हैं।

उन्होंने कहा, “भारत कई दशकों से आतंकवाद की चुनौती का सामना कर रहा है और इसलिए हम अच्छी तरह जानते हैं कि छोटे हथियारों और गोला-बारूद की अवैध आपूर्ति और ट्रांसफर से सशस्त्र गैर-राज्य तत्वों और आतंकी संगठनों को कितना बड़ा खतरा पैदा होता है।”

उनके यह बयान ऐसे समय में आए हैं जब नई दिल्ली में लाल क़िले के पास हुए एक भीषण धमाके में कम से कम नौ लोगों की मौत हो गई और कई घायल हुए।

हरीश ने कहा, “भारत को सीमापार आतंकवाद का सामना करना पड़ा है, जिसमें ड्रोन के माध्यम से हमारी सीमाओं के पार से तस्करी किए गए अवैध हथियारों का इस्तेमाल किया जा रहा है।” उन्होंने यह भी कहा कि बढ़ते हथियारों के जखीरे और उनकी आधुनिक तकनीक इस बात का प्रमाण है कि बिना सहयोग, वित्तीय मदद और समर्थन के ये आतंकी समूह इस कदर सक्रिय नहीं रह सकते।

भारत ने सुरक्षा परिषद को बताया कि छोटे हथियारों और उनसे जुड़े गोला-बारूद की अवैध तस्करी सशस्त्र समूहों और आतंकवादी संगठनों को जीवित रखने का एक बड़ा कारण है। इसलिए इन संगठनों को हथियार उपलब्ध होने से रोकने के लिए समन्वित कार्रवाई बेहद जरूरी है।

भारत ने कहा कि सुरक्षा परिषद द्वारा लगाए गए हथियार प्रतिबंध एक महत्वपूर्ण उपकरण हैं और इन्हें निष्पक्ष और सख्ती से लागू किया जाना चाहिए।

हरीश ने छोटे और हल्के हथियारों की अवैध तस्करी और इनके उपयोग को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बताया। यह एक जटिल और बहुआयामी समस्या है, जिसका विकास, सुरक्षा, मानवीय और सामाजिक-आर्थिक पहलुओं पर सीधा प्रभाव पड़ता है।

उन्होंने कहा कि भारत इस चुनौती से निपटने को अत्यधिक महत्व देता है और सुरक्षा व विकास दोनों आयामों को ध्यान में रखते हुए एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने पर बल देता है। उन्होंने मजबूत कानूनी ढांचे, राजनीतिक इच्छाशक्ति, बेहतर डेटा प्रबंधन, सीमा सुरक्षा और हथियार भंडारण प्रबंधन को प्रभावी नियंत्रण के लिए आवश्यक बताया।

हरीश ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग तस्करी नेटवर्क को तोड़ने, सीमा समन्वय बढ़ाने और समय पर खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान के लिए अपरिहार्य है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र के ‘प्रोग्राम ऑफ एक्शन’ (PoA) और ‘इंटरनेशनल ट्रेसिंग इंस्ट्रूमेंट’ (ITI) के प्रभावी क्रियान्वयन को मजबूत करने के प्रयासों का समर्थन किया।

उन्होंने पुनः दोहराया कि भारत आतंकवादी संगठनों द्वारा छोटे हथियारों और हल्के हथियारों के दुरुपयोग को रोकने के प्रति प्रतिबद्ध है और वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अपना योगदान जारी रखेगा।

पीटीआई

वर्ग: ब्रेकिंग न्यूज़

SEO टैग्स: #स्वदेशी, #न्यूज़, भारत ने यूएनएससी से कहा: सीमापार आतंक और अवैध हथियार तस्करी से क्षेत्रीय शांति को खतरा