भारत निर्वाचन आयोग के शीर्ष अधिकारियों ने राज्य मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ देशव्यापी विशेष पुनरीक्षण (SIR) पर की चर्चा

**EDS: THIRD PARTY IMAGE** In this image received on Oct. 17, 2025, Chief Election Commissioner (CEC) Gyanesh Kumar with Election Commissioners Sukhbir Singh Sandhu and Vivek Joshi during a meeting with the heads of enforcement agencies and forces as part of preparations for the upcoming Bihar Assembly elections. (@ECISVEEP/X via PTI Photo) (PTI10_17_2025_000210B)

नई दिल्ली, 22 अक्टूबर (PTI) – निर्वाचन आयोग (EC) के शीर्ष अधिकारी बुधवार को राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे हैं ताकि मतदाता सूची को शुद्ध करने के लिए देशव्यापी विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) की योजना को अंतिम रूप दिया जा सके।

दो दिन तक चलने वाली यह बैठक सितंबर के बाद दूसरी है, जिसका उद्देश्य इस बड़े पैमाने के अभियान पर निर्णय लेना है।

अधिकारियों ने बताया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ग्यानेश कुमार और निर्वाचन आयुक्त एस. एस. संधू तथा विवेक जोशी सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों से बैठक कर रहे हैं। यह विचार-विमर्श गुरुवार तक जारी रहेगा।

सूत्रों के अनुसार, आयोग के शीर्ष अधिकारियों के बीच यह राय उभरकर आई है कि SIR को चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाए, जिसकी शुरुआत उन राज्यों से हो सकती है जहाँ अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं। पहले चरण में कुछ और राज्यों को भी शामिल किया जा सकता है।

साथ ही, जिन राज्यों में स्थानीय निकाय चुनाव हो रहे हैं या होने वाले हैं, वहाँ SIR नहीं कराया जाएगा, क्योंकि वहाँ की चुनावी मशीनरी पहले से ही व्यस्त है और पुनरीक्षण कार्य पर पूरा ध्यान नहीं दे पाएगी।

असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में 2026 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। इन पाँच राज्यों के अलावा कुछ अन्य राज्यों में भी पहले चरण में SIR आयोजित किए जाने की संभावना है।

बिहार में हाल ही में मतदाता सूची शुद्धिकरण का कार्य पूरा हो चुका है, जहाँ 30 सितंबर को अंतिम सूची प्रकाशित की गई जिसमें लगभग 7.42 करोड़ नाम शामिल हैं।

CEC ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि सभी राज्यों में SIR शुरू करने की दिशा में काम चल रहा है, और इसके कार्यान्वयन की अंतिम तिथि पर निर्णय आयोग करेगा।

बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा करते हुए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में CEC ने कहा था कि EC ने 24 जून को बिहार SIR की शुरुआत के समय ही पूरे देश में SIR लागू करने की योजना की घोषणा की थी।

अधिकारियों के अनुसार, पिछले महीने आयोग ने राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को 10 से 15 दिनों के भीतर SIR शुरू करने की तैयारी रखने के लिए कहा था, जबकि अधिक स्पष्टता के लिए 30 सितंबर की समयसीमा तय की गई थी।

मुख्य निर्वाचन अधिकारियों से कहा गया है कि वे अपने राज्यों की पिछले SIR के बाद प्रकाशित मतदाता सूची तैयार रखें। कई राज्यों ने पहले ही अपनी वेबसाइट पर यह सूचियाँ डाल दी हैं।

दिल्ली के CEO की वेबसाइट पर 2008 की मतदाता सूची उपलब्ध है, जब राष्ट्रीय राजधानी में अंतिम गहन पुनरीक्षण हुआ था। वहीं, उत्तराखंड में अंतिम SIR 2006 में हुआ था और उस वर्ष की मतदाता सूची अब राज्य CEO की वेबसाइट पर है।

राज्यों के पिछले SIR को कट-ऑफ तिथि के रूप में माना जाएगा, जैसे बिहार में 2003 की मतदाता सूची का उपयोग गहन पुनरीक्षण के लिए किया गया था।

अधिकांश राज्यों में 2002 से 2004 के बीच आखिरी बार SIR हुआ था। अब अधिकांश राज्यों ने वर्तमान मतदाताओं को उनके पिछले SIR के अनुसार मैप करने का कार्य लगभग पूरा कर लिया है।

SIR का मुख्य उद्देश्य विदेशी अवैध प्रवासियों की पहचान कर उन्हें मतदाता सूची से हटाना है, जिसके लिए उनके जन्म स्थान की जांच की जाएगी।

यह कदम विशेष रूप से बांग्लादेश और म्यांमार से आने वाले अवैध प्रवासियों पर चल रहे सख्त अभियान के मद्देनजर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़

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