कोलकाता, 2 जनवरी (PTI) – भारत-यूके कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) 2026 की पहली छमाही में लागू होने की संभावना है, जो द्विपक्षीय सहयोग के नए चरण की शुरुआत करेगा, यह बात ब्रिटिश डिप्टी हाइ कमिश्नर एंड्रयू फ्लेमिंग ने कही।
PTI से बातचीत में फ्लेमिंग ने CETA को दोनों सरकारों द्वारा किए गए सबसे “व्यापक और महत्वाकांक्षी” समझौते के रूप में वर्णित किया, जो लगभग 20,000 पन्नों में फैला है। उन्होंने क्षेत्रीय व्यवसायों, विशेषकर पश्चिम बंगाल और पूर्व व उत्तर-पूर्व भारत के 12 राज्यों में मौजूद उद्यमियों से इसका लाभ उठाने की तैयारी करने का आग्रह किया।
फ्लेमिंग ने कहा, “यह मुक्त व्यापार समझौता मेरी सरकार द्वारा किए गए सबसे व्यापक और महत्वाकांक्षी समझौते में से एक है। मुझे लगता है कि यही भारतीय सरकार पर भी लागू होता होगा।”
भारत ने CETA पर 24 जुलाई को हस्ताक्षर किए थे। यह समझौता 26 क्षेत्रों को कवर करता है—टैरिफ से लेकर प्रौद्योगिकी तक—और वस्तुओं और सेवाओं में द्विपक्षीय व्यापार को वर्तमान 56 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़ाकर 112 बिलियन अमेरिकी डॉलर करने का लक्ष्य रखता है। समझौते के तहत, भारतीय निर्यातकों को 99 प्रतिशत उत्पादों पर शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी, जिनमें वस्त्र, चमड़ा, समुद्री उत्पाद, रत्न और आभूषण, खिलौने, इंजीनियरिंग उत्पाद, रसायन और ऑटो घटक शामिल हैं। ब्रिटेन के उत्पादों जैसे व्हिस्की को भी टैरिफ सुधार का लाभ मिलेगा।
फ्लेमिंग ने कहा, “हम उम्मीद करते हैं कि 2026 की पहली छमाही तक यह लागू हो जाएगा। हम इस दिशा में लगातार आगे बढ़ रहे हैं।”
यह समझौता सेवाओं के व्यापार को भी मजबूत करता है—भारत के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र—जहाँ 2023 में 19.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक की सेवाएं यूके को निर्यात की गईं।
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