नई दिल्ली, 2 जून (पीटीआई) — गर्मियों के दौरान यात्रा में बढ़ोतरी से मई महीने में लगातार दूसरे महीने पेट्रोल की खपत में तेज़ी देखी गई, जबकि डीज़ल की मांग सुस्त रही। यह जानकारी अस्थायी औद्योगिक आंकड़ों से सामने आई है।
मई में पेट्रोल की खपत 8.77 प्रतिशत बढ़कर 3.76 मिलियन टन हो गई, जो एक साल पहले मई 2023 में 3.46 मिलियन टन थी। यह वृद्धि मई 2023 की तुलना में 12.45 प्रतिशत अधिक रही, जब खपत 3.35 मिलियन टन थी।
अप्रैल में भी इसी तरह की वृद्धि दर्ज की गई थी।
वहीं, डीज़ल की बिक्री 2 प्रतिशत बढ़कर 8.57 मिलियन टन रही। यह भारत में सबसे अधिक उपयोग होने वाला ईंधन है, जिसकी मांग अप्रैल के बाद से धीरे-धीरे सुधरी है।
वित्त वर्ष 2024-25 (31 मार्च 2025 को समाप्त) में डीज़ल की मांग में सिर्फ 2 प्रतिशत की वृद्धि हुई। अप्रैल में डीज़ल की खपत लगभग 4 प्रतिशत बढ़कर 8.23 मिलियन टन हो गई थी। मई में डीज़ल की बिक्री पिछले साल मई की तुलना में 2 प्रतिशत अधिक और मई 2023 की तुलना में 4.3 प्रतिशत अधिक रही।
गर्मियों की शुरुआत ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई और शहरी क्षेत्रों में एयर कंडीशनर की मांग बढ़ा देती है, जिससे ईंधनों की खपत पर असर पड़ता है।
उद्योग अधिकारियों ने बताया कि बीते कुछ महीनों में डीज़ल की मांग धीमी रही, जिससे इसके भविष्य को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं।
अप्रैल से मांग में जो वृद्धि देखी गई, उसका श्रेय चुनाव प्रचार में बढ़े उपभोग को भी दिया जा रहा है।
जेट ईंधन (एटीएफ) की खपत में मई में 4.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 7.75 लाख टन रही। यह बिक्री मई 2023 की तुलना में 15.65 प्रतिशत अधिक रही।
रसोई गैस (एलपीजी) की मांग मई में 13.4 प्रतिशत बढ़कर 2.79 मिलियन टन रही, जिसे उज्ज्वला योजना के तहत कनेक्शनों से प्रोत्साहन मिला। वर्ष 2019 से अब तक एलपीजी की खपत 37 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ी है।
मई 2023 में 2.44 मिलियन टन की तुलना में इस बार रसोई गैस की बिक्री 14.4 प्रतिशत अधिक रही।
पीटीआई एएनजेड डीआरआर
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