मजबूत लोकतंत्र के लिए शुद्ध मतदाता सूची अनिवार्य: मुख्य चुनाव आयुक्त

New Delhi: Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar addresses the International Institute for Capacity Development in Electoral Management (IICDEM) 2026 conference, in New Delhi, Wednesday, Jan. 21, 2026. (PTI Photo)(PTI01_21_2026_000115B)

नई दिल्ली, 21 जनवरी (पीटीआई) — विपक्षी दलों द्वारा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन—SIR) पर सवाल उठाए जाने की पृष्ठभूमि में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने बुधवार को कहा कि “शुद्ध” मतदाता सूची लोकतंत्र को मजबूत करने की कुंजी है।

यहां चुनाव प्रबंधन निकायों के एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पिछले वर्ष बिहार में कराए गए मतदाता सूची पुनरीक्षण अभ्यास के दौरान किसी भी मतदाता के नाम के शामिल किए जाने या हटाए जाने को चुनौती देते हुए एक भी शिकायत दर्ज नहीं की गई।

कुमार ने यह भी बताया कि बिहार विधानसभा चुनाव के दो चरणों में राज्य के करीब एक लाख मतदान केंद्रों में कहीं भी पुनर्मतदान (री-पोल) का आदेश नहीं देना पड़ा।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा, “कानून के अनुसार प्रत्येक मतदाता को शामिल करने वाली शुद्ध मतदाता सूची लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए आवश्यक है और इसी मतदाता सूची के आधार पर होने वाले सभी चुनाव लोकतंत्र को और सुदृढ़ करेंगे।”

उन्होंने कहा कि बिहार में मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण कड़ी सार्वजनिक निगरानी के बीच किया गया। सूचियों की शुद्धता से लेकर चुनाव संचालन तक, स्थानीय चुनावी तंत्र ने उच्च स्तर की दक्षता का प्रदर्शन किया।

विपक्षी दल विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर भाजपा सरकार और चुनाव आयोग पर हमलावर रहे हैं और इसे मतों में हेरफेर का प्रयास बताते रहे हैं। हालांकि, सरकार और चुनाव आयोग ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।

SIR का दूसरा चरण 4 नवंबर से अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह, लक्षद्वीप, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में शुरू हुआ था। असम में मतदाता सूचियों का एक अलग ‘विशेष पुनरीक्षण’ जारी है।

राज्यों में अंतिम SIR को कट-ऑफ तिथि माना जाएगा, ठीक वैसे ही जैसे 2003 की बिहार मतदाता सूची का उपयोग चुनाव आयोग ने गहन पुनरीक्षण के लिए किया था। अधिकांश राज्यों में मतदाता सूचियों का अंतिम SIR वर्ष 2002 से 2004 के बीच हुआ था।

SIR का मुख्य उद्देश्य जन्मस्थान की जांच के जरिए विदेशी अवैध प्रवासियों की पहचान कर उन्हें सूची से हटाना है। यह कदम विभिन्न राज्यों में बांग्लादेश और म्यांमार सहित अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई की पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट (IICDEM-2026) में करीब 70 देशों के लगभग 100 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। IICDEM-2026 लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन के क्षेत्र में भारत द्वारा आयोजित अपनी तरह का अब तक का सबसे बड़ा सम्मेलन है।

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