इम्फाल, 24 जनवरी (भाषा)। मणिपुर उच्च न्यायालय ने केंद्रीय अधिकारियों से चूड़ाचंदपुर जिले में सशस्त्र उपद्रवियों द्वारा एक व्यक्ति की कथित रूप से हत्या किए जाने के वायरल वीडियो को अवरुद्ध करने के बारे में जानकारी देने को कहा है।
केंद्र ने इससे पहले अदालत को सूचित किया था कि सोशल मीडिया मंचों को वीडियो हटाने का निर्देश दिया गया था।
मणिपुर सरकार द्वारा आयुक्त (गृह) के माध्यम से दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति ए गुणेश्वर शर्मा की एकल पीठ ने कहा कि महाधिवक्ता ने अदालत को सूचित किया था कि “एक पीड़ित का एक वायरल वीडियो है… और उसकी हत्या कुछ अज्ञात उपद्रवियों ने की थी, और इसे सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया है और इससे सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने की संभावना है”।
21 जनवरी को सामने आए वीडियो में कथित तौर पर चूड़ाचंदपुर जिले में अपनी जान की गुहार लगाने के बावजूद संदिग्ध आतंकवादियों द्वारा एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या करते हुए दिखाया गया है। क्लिप को “कोई शांति नहीं, कोई लोकप्रिय सरकार नहीं” संदेश के साथ प्रसारित किया गया था।
22 जनवरी के अपने आदेश में, अदालत ने कहा कि यह प्रस्तुत किया गया है कि आधिकारिक उत्तरदाताओं-मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक, यूट्यूब के लिए शिकायत अधिकारी, गूगल एलएलसी, गूगल इंडिया डिजिटल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और व्हाट्सएप इंक-को वायरल वीडियो को हटाने का निर्देश दिया जाए। आदेश में आगे कहा गया है कि भारत के उप सॉलिसिटर जनरल की सहायता करने वाले वकील ने अदालत को सूचित किया कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने पहले ही 22 जनवरी को एक अवरोधन आदेश जारी कर दिया था।
यह आदेश सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69ए के तहत पारित किया गया था, जिसे सूचना प्रौद्योगिकी (जनता द्वारा सूचना तक पहुंच को अवरुद्ध करने के लिए प्रक्रिया और सुरक्षा उपाय) नियम, 2009 के साथ पढ़ा गया था।
अदालत ने प्रतिवादियों-(सचिव, दूरसंचार विभाग, संचार मंत्रालय, और महानिदेशक (डीआईटी) साइबर कानून और ई-सुरक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय-को वायरल क्लिप को अवरुद्ध करने की प्रगति पर रिकॉर्ड पर अद्यतन जानकारी देने का निर्देश दिया। पीटीआई सीओआर एनएन एमएनबी
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