मदुरै मंदिर के ‘कार्तिगाई दीपम’ विवाद ने लोकसभा में DMK और BJP के बीच तीखी नोकझोंक छेड़ी

Madurai: A lamp lit at Thiruparankundram temple as part of 'Karthigai Deepam' festival celebrations, in Madurai district, Tamil Nadu, Wednesday, Dec. 3, 2025. (PTI Photo) (PTI12_03_2025_000753B)

नई दिल्ली, 5 दिसंबर (PTI) मदुरै के पास एक पहाड़ी मंदिर में पारंपरिक दीप प्रज्वलन के मुद्दे ने शुक्रवार को लोकसभा में हंगामा खड़ा कर दिया। DMK नेता टी. आर. बालू ने आरोप लगाया कि BJP तमिलनाडु में “साम्प्रदायिक तनाव भड़काने” की कोशिश कर रही है, जबकि केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन ने राज्य सरकार पर “पूजा के अधिकार से वंचित करने” का आरोप लगाया।

शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए बालू ने दावा किया कि तिरुप्परंकुंद्रम पहाड़ी पर स्थित पत्थर के दीप स्तंभ ‘दीपतून’ पर कार्तिगाई दीपम जलाने की अनुमति देने वाले मद्रास हाईकोर्ट के न्यायाधीश की एक “विशेष विचारधारा” से निष्ठा है।

बालू की टिप्पणी पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि न्यायपालिका पर इस तरह की टिप्पणी स्वीकार्य नहीं है तथा इन्हें कार्यवाही से हटाया जाना चाहिए।

DMK सदस्य लोकसभा के वेल में पहुंचकर नारेबाज़ी करने लगे, जिससे प्रश्नकाल स्थगित करना पड़ा।

BJP नेता और केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन ने कहा कि तमिलनाडु सरकार अरुलमिघु सुब्रमण्य स्वामी मंदिर के श्रद्धालुओं के पूजा-अधिकार छीन रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद तमिलनाडु पुलिस ने मंदिर की ओर जा रहे श्रद्धालुओं को रोका और कई को गिरफ्तार भी किया।

उन्होंने यह भी बताया कि CISF के संरक्षण में श्रद्धालु दीप जलाने जा रहे थे, फिर भी पुलिस ने उन्हें रोक दिया। तमिलनाडु BJP अध्यक्ष को भी गिरफ्तार किया गया है।

इसी बीच DMK के कुछ सदस्य रिजिजू की सीट तक पहुंच गए, जिस पर पीठासीन अध्यक्ष कृष्ण प्रसाद तेनेंटी ने उन्हें अपनी जगह पर लौटने की अपील की।

उधर, सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तमिलनाडु सरकार की उस याचिका पर जल्द सुनवाई करने पर सहमति जताई, जिसमें मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट ने अरुलमिघु सुब्रमण्य स्वामी मंदिर के भक्तों को तिरुप्परंकुंद्रम की पहाड़ी पर स्थित दीपतून पर कार्तिगाई दीपम जलाने की अनुमति दी थी।

मदुरै बेंच ने गुरुवार को जिला कलेक्टर और पुलिस आयुक्त की डबल बेंच अपील खारिज कर दी और एकल-न्यायाधीश के आदेश को बरकरार रखा।

एक दिसंबर को जस्टिस जी. आर. स्वामीनाथन ने कहा था कि मंदिर प्रबंधन का दायित्व है कि वह दीपतून पर दीप जलाए, और इससे पास स्थित दरगाह या मुस्लिम समुदाय के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होता।

जब आदेश का पालन नहीं हुआ, तो न्यायाधीश ने 3 दिसंबर को एक और आदेश जारी करते हुए श्रद्धालुओं को स्वयं दीप जलाने की अनुमति दी और CISF को सुरक्षा देने को कहा। PTI SKU SKU DV DV

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