
न्यूयॉर्क, 2 जनवरी (पीटीआई): भारतीय मूल के राजनेता जोहरान ममदानी ने न्यूयॉर्क वासियों के लिए किफायती जीवन से जुड़ा एजेंडा लागू करने और “विस्तृत व साहसिक तरीके से” शासन करने का संकल्प लिया। न्यूयॉर्क सिटी के 112वें मेयर के रूप में शपथ लेने के बाद उन्होंने “कम्पाला से दिल्ली” तक अपने परिवार को धन्यवाद दिया।
गुरुवार को न्यूयॉर्क सिटी सरकार के मुख्यालय सिटी हॉल के बाहर आयोजित औपचारिक समारोह में, वरमोंट के सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने ममदानी को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इससे पहले, 31 दिसंबर को नए वर्ष के आगमन के समय यहां एक पुराने सबवे स्टेशन में आयोजित निजी समारोह में न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स ने उन्हें औपचारिक रूप से शपथ दिलाई थी।
ममदानी अमेरिका के सबसे बड़े शहर की कमान संभालने वाले पहले दक्षिण एशियाई और मुस्लिम मेयर बने हैं।
गुरुवार को शपथ ग्रहण के बाद करीब 25 मिनट के अपने संबोधन में ममदानी ने कहा, “आज से हम विस्तृत और साहसिक ढंग से शासन करेंगे। हम हमेशा सफल हों, यह जरूरी नहीं। लेकिन कोशिश करने का साहस न होने का आरोप हम पर कभी नहीं लगेगा।” उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में सिटी हॉल “सुरक्षा, किफायत और समृद्धि” का एजेंडा लागू करेगा—जहां सरकार अपने प्रतिनिधित्व करने वाले लोगों जैसी दिखे और वैसी ही जिए, कॉरपोरेट लालच के खिलाफ लड़ाई में कभी पीछे न हटे और उन चुनौतियों से न डरे जिन्हें अन्य लोग बहुत जटिल मानते रहे हैं।
भारतीय मूल के ममदानी प्रसिद्ध फिल्मकार मीरा नायर और कोलंबिया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मह्मूद ममदानी के पुत्र हैं। उनका जन्म और पालन-पोषण युगांडा के कम्पाला में हुआ और वे सात वर्ष की उम्र में परिवार के साथ न्यूयॉर्क सिटी आए। वे 2018 में हाल ही में अमेरिकी नागरिक बने।
ममदानी ने शपथ समारोह में मौजूद अपने माता-पिता और अपनी पत्नी रमा दुवाजी को समर्थन के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने युगांडा से भारत तक फैले अपने परिवार के प्रति भी आभार जताया।
उन्होंने कहा, “मेरे माता-पिता—मामा और बाबा—का धन्यवाद, जिन्होंने मुझे पाला-पोसा, दुनिया में रहने का तरीका सिखाया और मुझे इस शहर तक लाए। कम्पाला से दिल्ली तक मेरे परिवार का धन्यवाद। और मेरी पत्नी रमा का धन्यवाद—मेरी सबसे अच्छी दोस्त होने और रोजमर्रा की चीज़ों में सुंदरता दिखाने के लिए।”
1 जनवरी को हजारों समर्थक—युवा से लेकर बुज़ुर्ग तक—कड़ाके की ठंड के बावजूद सिटी हॉल के बाहर घंटों खड़े रहे, उन्हें जयकारे दिए और इस अवसर पर आयोजित ब्लॉक पार्टी में उनकी जीत व शपथ ग्रहण का जश्न मनाया। समर्थकों ने कहा कि नया साल आशा और वादे के एक नए दौर की शुरुआत कर रहा है। वे ममदानी के नाम और तस्वीरों वाले पिन, टोपी और टी-शर्ट पहने हुए थे।
अपने संबोधन में ममदानी ने एकता का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि मिलकर साढ़े आठ मिलियन न्यूयॉर्कवासी शहर की एक नई कहानी लिखेंगे। “यह न तो एक प्रतिशत के लिए शासित एक शहर की कहानी होगी, न ही अमीर बनाम गरीब—दो शहरों की। यह साढ़े आठ मिलियन शहरों की कहानी होगी—हर एक न्यूयॉर्कवासी, अपनी आशाओं और आशंकाओं के साथ; हर एक एक ब्रह्मांड, और सभी एक-दूसरे से बुने हुए।”
उन्होंने कहा, “इस कहानी के लेखक पश्तो और मंदारिन, यिडिश और क्रियोल बोलेंगे। वे मस्जिदों में, सिनेगॉग (शुल) में, चर्चों में, गुरुद्वारों और मंदिरों में प्रार्थना करेंगे—और बहुत से लोग बिल्कुल भी प्रार्थना नहीं करेंगे।” उन्होंने जोड़ा कि “इन साढ़े आठ मिलियन में से बहुत कम लोग आसान खांचों में फिट होंगे। कुछ ऐसे मतदाता होंगे जिन्होंने एक साल पहले राष्ट्रपति ट्रंप का समर्थन किया था और बाद में मुझे वोट दिया—अपनी पार्टी के प्रतिष्ठान से निराश होकर।”
उन्होंने कहा, “अधिकांश लोग वह भाषा नहीं बोलेंगे जिसकी हम प्रभावशाली लोगों से अपेक्षा करते हैं। मैं इस बदलाव का स्वागत करता हूं। बहुत लंबे समय तक, शिष्टाचार की अच्छी व्याकरण में निपुण लोगों ने निर्ममता के एजेंडे छिपाने के लिए मर्यादा का इस्तेमाल किया।” यह उनके पूरे भाषण में ट्रंप का एकमात्र संदर्भ था।
नवंबर में हुए चुनाव में ममदानी ने निर्णायक और ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार कर्टिस स्लीवा और राजनीतिक दिग्गज, न्यूयॉर्क राज्य के पूर्व गवर्नर एंड्रयू कुओमो—जो निर्दलीय उम्मीदवार थे और जिन्हें चुनाव की पूर्वसंध्या पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन मिला—को हराया।
अपनी जोशीली विजय भाषण में ममदानी ने आप्रवासन पर ट्रंप को चुनौती दी थी, “राजनीतिक वंशवाद” के पतन की बात कही थी और कहा था कि उनकी जीत “तानाशाही और बड़े धन” पर “आशा” की विजय का प्रतीक है। उन्होंने पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का उद्धरण देते हुए कहा था कि शहर “पुराने से नए” की ओर बढ़ चुका है।
उन्होंने कहा था, “आपके सामने खड़ा होकर मुझे जवाहरलाल नेहरू के शब्द याद आते हैं: ‘इतिहास में बहुत कम ही ऐसा क्षण आता है जब हम पुराने से नए की ओर कदम रखते हैं…’ आज रात हम पुराने से नए में प्रवेश कर चुके हैं। अब आइए स्पष्टता और दृढ़ विश्वास के साथ बताएं कि यह नया युग क्या देगा और किसके लिए।”
— पीटीआई वाईएएस एएमएस
