
मुंबई, 4 जुलाई (PTI) – महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को कहा कि राज्य में लोगों से मराठी बोलने की अपेक्षा रखना गलत नहीं है, लेकिन इसे लेकर हिंसा करना अस्वीकार्य है और इस पर कोई ज़िद नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने इस मुद्दे पर कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी।
मुख्यमंत्री का यह बयान हाल ही में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के कार्यकर्ताओं द्वारा ठाणे जिले के भायंदर में एक फूड स्टॉल मालिक पर मराठी नहीं बोलने को लेकर हमला करने और मुंबई के एक व्यवसायी द्वारा मराठी नहीं बोलने की सार्वजनिक घोषणा करने की घटना के संदर्भ में आया।
फडणवीस ने विधान भवन में पत्रकारों से कहा, “आप महाराष्ट्र में लोगों से मराठी बोलने को कह सकते हैं, लेकिन मराठी को लेकर ज़िद नहीं कर सकते।”
उन्होंने आगे कहा, “मराठी लोगों में अन्य भाषाओं के प्रति इतनी नफरत नहीं हो सकती।”
भाषायी कट्टरता को लेकर उन्होंने चेताया, “मैं भी मराठी हूं। अन्य राज्यों में मराठी लोग काम करते हैं। अगर उन्हें भी वैसा ही बर्ताव झेलना पड़े तो यह सही नहीं है। जो भी कानून हाथ में लेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।”
उन्होंने भाषाओं को लेकर चयनात्मक आक्रोश की आलोचना करते हुए कहा, “मैं कभी-कभी सोचता हूं कि ये लोग अंग्रेज़ी को तो सहजता से अपनाते हैं, लेकिन हिंदी पर विवाद खड़ा करते हैं। यह कैसी सोच है?”
मराठी भाषा के रचनात्मक प्रचार की बात करते हुए उन्होंने कहा, “अगर आपको सच में मराठी पर गर्व है, तो आप खुद मराठी बोलें, दूसरों को भी प्रोत्साहित करें। मराठी सिखाने की कक्षाएं शुरू करें। फिर आप अपने बच्चों को ऐसी स्कूलों में क्यों भेजते हैं जहां मराठी तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाई जाती है? उन्हें मराठी माध्यम स्कूलों में भेजिए।”
फडणवीस ने कहा कि पुलिस ने उस व्यवसायी से मारपीट करने वाले MNS कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की है।
राज्य में कक्षा 1 से 5 तक के स्कूलों में हिंदी भाषा लागू करने के विरोध के बीच तीन-भाषा नीति से जुड़ी दो सरकारी प्रस्तावों (GRs) को वापस लेने के मामले में उन्होंने कहा कि विरोधी दल अवसरवादी हैं।
उन्होंने कहा, “इन दोनों दलों को प्रस्ताव रद्द होने से बहुत खुशी मिल रही है, लेकिन जनता जानती है कि जब उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री थे, तब उनकी सरकार ने ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को स्वीकार किया था, समिति बनाई थी और यही फैसले लागू किए थे।”
“हमने अब एक समिति बनाई है जो सभी पहलुओं की समीक्षा करेगी। जो भी छात्रों के हित में होगा, वही हम लागू करेंगे,” उन्होंने कहा।
गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी में पुणे में एक कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा “जय गुजरात” का नारा लगाने के मामले पर फडणवीस ने अपने सहयोगी का बचाव किया।
उन्होंने कहा, “वह गुजराती समाज के कार्यक्रम में आमंत्रित थे। उनका बयान उस संदर्भ में था। इसका मतलब यह नहीं कि उन्हें महाराष्ट्र से अधिक गुजरात से प्रेम है।”
उन्होंने कहा कि इस तरह की व्याख्याएं संकुचित सोच को दर्शाती हैं।
फडणवीस ने कहा, “कुछ साल पहले शरद पवार कर्नाटक के चिक्कोडी गए थे और उन्होंने ‘जय महाराष्ट्र, जय कर्नाटक’ का नारा दिया था। तो क्या इसका मतलब यह हुआ कि उन्हें कर्नाटक से ज्यादा प्रेम है?”
उन्होंने कहा, “मराठी भाषा को लेकर इस तरह की संकुचित सोच ठीक नहीं है। मराठी भाषा और मराठी लोगों ने हर क्षेत्र में बहुत बड़ा योगदान दिया है। देश के स्वतंत्रता आंदोलन में भी कई प्रमुख मराठी हस्तियां थीं।”
नागपुर-गोवा शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे के बारे में बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “ज्यादातर ज़मीन से जुड़े मुद्दों का समाधान हो गया है। सांगली के कुछ किसानों ने आपत्ति जताई है। हम कोल्हापुर में रियलाइनमेंट पर विचार कर रहे हैं। अब इस परियोजना का विरोध केवल राजनीतिक है।”
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