
जम्मू, 5 फरवरी (PTI) जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को कश्मीर में मस्जिदों, मदरसों और उनके प्रबंधन से जुड़े लोगों की प्रोफाइलिंग की आवश्यकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसा अभ्यास अनावश्यक है और इससे पुलिस की मंशा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा होती हैं।
यह कवायद पिछले वर्ष ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल के भंडाफोड़ के बाद पिछले महीने शुरू की गई थी। विधानसभा में उपराज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान अब्दुल्ला ने कहा, “मस्जिदों के इमामों का सर्वेक्षण करने की क्या जरूरत है? यह बिल्कुल नहीं किया जाना चाहिए था।” उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को इस कदम के पीछे के उद्देश्य को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल इस मुद्दे पर लिखने के कारण लोगों को पूछताछ के लिए थानों में बुलाना यह आभास देता है कि स्वयं अधिकारी भी अपने कदमों को लेकर आश्वस्त नहीं हैं।
संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लेख करते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि रिपोर्टिंग या राय के आधार पर लेखकों या टिप्पणीकारों को थानों में बुलाना केवल आशंकाओं को और गहरा करेगा।
जनवरी में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कश्मीर घाटी में मस्जिदों, मदरसों और उनके प्रबंधन की प्रोफाइलिंग शुरू की थी। इस कवायद को लेकर आलोचना हुई, जब श्रीनगर में पत्रकारों ने कवरेज के सिलसिले में पूछताछ के लिए बुलाए जाने की जानकारी दी।
आरक्षण के मुद्दे का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने अपने वादे को पूरा करने के लिए अपनी क्षमता के भीतर जो कुछ भी संभव था, वह किया।
उन्होंने कहा, “कैबिनेट उप-समिति ने निर्धारित समय के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंप दी। सरकार ने रिपोर्ट की समीक्षा की, जिसके बाद एक कैबिनेट नोट तैयार किया गया। मंत्रिपरिषद ने प्रस्ताव पर चर्चा कर उसे मंजूरी दी और फिर उपराज्यपाल को भेजा।
हमने अपना काम पूरा कर दिया। अब उपराज्यपाल ने इस मामले को आगे की कार्रवाई के लिए गृह मंत्री को भेज दिया है।”
पिछले पांच वर्षों में केंद्र सरकार द्वारा अधिक समुदायों को आरक्षित श्रेणी में शामिल करने और केंद्र शासित प्रदेश में कोटा बढ़ाने के फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर में आरक्षण एक बड़ा मुद्दा बन गया है।
2024 में पहाड़ियों और अन्य जनजातियों के लिए अलग से 10 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा और ओबीसी कोटा बढ़ाकर आठ प्रतिशत किए जाने के बाद केंद्र के 70 प्रतिशत तक आरक्षण बढ़ाने के कदम को लेकर विरोध बढ़ा है।
आलोचकों और प्रदर्शनकारियों, जिनमें पीडीपी और पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के विधायक भी शामिल हैं, पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब नए आरक्षणों की घोषणा की गई थी, तब वे चुनावी नुकसान के डर से चुप थे।
उन्होंने कहा, “जो लोग हमारे पीछे ‘आरक्षण, आरक्षण, आरक्षण’ चिल्लाते हुए दौड़ते रहते हैं और मेरे घर के बाहर गर्व से प्रदर्शन करते हैं—वे केंद्रीय गृह मंत्री के घर के बाहर क्यों नहीं जाते? कम से कम एक-दो नारे ही लगा दें। तब मुझे भी लगेगा कि वे साहसी लोग हैं।
अगर कुछ नहीं तो गृह मंत्री यहां आ रहे हैं और परसों एक बैठक है। समय निकालिए, एक ज्ञापन ले जाइए और गृह मंत्री से मिलिए। उनसे कहिए कि उनके पास भेजे गए आरक्षण के मामले को आगे बढ़ाएं। हमें जिम्मेदार ठहराना बहुत आसान है, हमें दोष देना बहुत आसान है। हमने अपना काम कर दिया है,” उन्होंने कहा। PTI TAS TAS NSD NSD
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