मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई बोले — अदालत पर हमला चौंकाने वाला था, लेकिन अब वह ‘बीता हुआ अध्याय’ है

नई दिल्ली, 9 अक्टूबर (पीटीआई):भारत के मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई ने गुरुवार को कहा कि वह और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन 6 अक्टूबर को तब स्तब्ध रह गए जब एक वकील ने उन पर जूता फेंकने की कोशिश की, लेकिन अब यह मुद्दा “भूल चुका अध्याय (forgotten chapter)” है।

यह अभूतपूर्व और चौंकाने वाली घटना सोमवार को हुई थी, जब 71 वर्षीय वकील राकेश किशोर ने जूता उतारकर मुख्य न्यायाधीश की ओर फेंकने की कोशिश की थी। इस कृत्य की सर्वत्र निंदा की गई।

सीजेआई गवई ने यह टिप्पणी उस समय की जब सुप्रीम कोर्ट में वनशक्ति (Vanashakti) फैसले की समीक्षा और संशोधन से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई चल रही थी। इस फैसले में केंद्र सरकार को उन परियोजनाओं को पीछे से पर्यावरणीय मंजूरी (retrospective/ex post facto environmental clearance) देने से रोका गया था जो पर्यावरण मानकों का उल्लंघन कर चुकी थीं।

मुख्य न्यायाधीश गवई ने कहा, “मेरे साथी न्यायमूर्ति (चंद्रन) और मैं सोमवार को हुई घटना से बहुत चौंक गए थे, लेकिन हमारे लिए यह अब बीता हुआ अध्याय है।”

न्यायमूर्ति उज्जल भुयान, जो इसी पीठ का हिस्सा थे, ने उस वकील के खिलाफ अपनाई गई कार्रवाई पर असहमति जताते हुए कहा, “इस पर मेरी अपनी राय है — वह मुख्य न्यायाधीश हैं, यह कोई मज़ाक की बात नहीं है!”

उन्होंने कहा कि यह हमला सुप्रीम कोर्ट की गरिमा पर आघात था और उचित कार्रवाई की जानी चाहिए थी।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस कृत्य को क्षमाहीन (unpardonable) बताया।

उन्होंने मुख्य न्यायाधीश की उदारता (magnanimity) और गरिमा (majesty) की सराहना की।

वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, जो उस समय अदालत में मौजूद थे, ने वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन से कहा कि वे मामले की सुनवाई आगे बढ़ाएं और इस चौंकाने वाली घटना पर अब चर्चा न करें।

मुख्य न्यायाधीश ने पुनः कहा, “हमारे लिए यह बीता हुआ अध्याय है,” और तत्पश्चात सुनवाई जारी रखी।

वर्ग: ब्रेकिंग न्यूज़

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