
शिमला, 11 फरवरी (पीटीआई) हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बुधवार को कहा कि उन्हें निशाना बनाने के बजाय भाजपा नेताओं को राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) की बहाली के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संपर्क करना चाहिए।
सुक्खू ने कहा, “मैंने इस मुद्दे पर कई बार एकजुट होकर आगे आने की अपील की है, लेकिन मुझे पता है कि वे (भाजपा नेता) ऐसा कभी नहीं करेंगे।”
सुक्खू ने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) समाप्त होने से 2026 से 2031 के बीच राज्य को प्रतिवर्ष लगभग 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर बार-बार एकजुट मोर्चा बनाने की अपील की है, लेकिन भाजपा नेताओं की सहयोग की इच्छा पर उन्हें संदेह है।
दिल्ली से लौटने के बाद मीडिया से बातचीत में सुक्खू ने कहा, “मुझे निशाना बनाने के बजाय भाजपा नेताओं को राजस्व घाटा अनुदान की बहाली के लिए प्रधानमंत्री से मिलना चाहिए। मैंने भाजपा नेताओं से कई बार आगे आने की अपील की है, लेकिन मुझे पता है कि वे ऐसा कभी नहीं करेंगे।”
दिल्ली में पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के साथ अपनी बैठक का विवरण साझा करते हुए सुक्खू ने कहा कि उन्होंने वरिष्ठ कांग्रेस नेता को 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट पर राज्य के दृष्टिकोण और उसके हिमाचल प्रदेश पर संभावित प्रभाव से अवगत कराया।
मुख्यमंत्री ने चिदंबरम के साथ पिछली भाजपा सरकार से विरासत में मिली वित्तीय स्थिति पर भी चर्चा की, जिसमें 75,000 करोड़ रुपये का कर्ज और वेतन एवं पेंशन बकाया के रूप में 10,000 करोड़ रुपये की देनदारियां शामिल हैं।
सुक्खू ने कहा कि इन चुनौतियों के बावजूद राज्य सरकार के कड़े भ्रष्टाचार-रोधी कदमों और प्रणालीगत सुधारों से पिछले तीन वर्षों में 3,800 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हुआ है।
मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, चिदंबरम ने कहा कि आरडीजी संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत एक प्रावधान है, जिसका उद्देश्य राज्यों की आय और व्यय के बीच संतुलन बनाना है। 17 राज्यों के लिए इस अनुदान को समाप्त करने की सिफारिश करते समय पहाड़ी और छोटे राज्यों के हितों की रक्षा की जानी चाहिए।
सुक्खू ने कहा कि चुनौतियों के बावजूद राज्य आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ा है और विभिन्न आर्थिक सुधार किए हैं।
उन्होंने कहा कि पिछली भाजपा सरकार के दौरान राज्य को 54,296 करोड़ रुपये का आरडीजी मिला था, जबकि वर्तमान सरकार को पिछले तीन वर्षों में केवल 17,563 करोड़ रुपये मिले हैं।
इसके अतिरिक्त, भाजपा सरकार को 16,000 करोड़ रुपये जीएसटी मुआवजा और 2020-21 में 11,431 करोड़ रुपये का अंतरिम अनुदान भी प्राप्त हुआ था।
उन्होंने दावा किया, “भाजपा शासन के पांच वर्षों में उन्हें लगभग 70,000 करोड़ रुपये मिले। यदि उन्होंने 40,000 करोड़ रुपये का कर्ज चुका दिया होता, तो राज्य कर्ज के जाल में नहीं फंसता।”
सुक्खू ने कहा, “पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को जनता को बताना चाहिए कि ये 70,000 करोड़ रुपये कहां खर्च हुए और इससे किसे लाभ हुआ।”
सुक्खू ने यह भी कहा कि सरकार किसी भी पद को समाप्त नहीं करेगी, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार सृजित करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा, “केंद्र से न्यूनतम अनुदान मिलने के बावजूद पेंशन के बकाए का भुगतान कर दिया गया है। 1 जनवरी 2016 से 31 दिसंबर 2021 के बीच सेवानिवृत्त हुए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की संशोधित पेंशन और संबंधित लाभों से जुड़े ग्रेच्युटी और अवकाश नकदीकरण के बकाए का भी भुगतान किया गया है, जो हमारी वित्तीय सूझबूझ का स्पष्ट उदाहरण है।”
उन्होंने कहा, “प्रशासनिक दक्षता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने अधिकारी स्तर के पदों में कटौती की है, जबकि निचले स्तर के पदों में वृद्धि की है।” PTI BPL ARI
