
प्रयागराज, 22 जनवरी (पीटीआई): माघ मेला प्रशासन और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के बीच टकराव एक बार फिर तेज हो गया है। प्रशासन ने उन्हें दूसरा नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि उनके संस्थान को यहां आवंटित भूमि और सुविधाएं क्यों न रद्द कर दी जाएं और उन्हें मेले में प्रवेश से स्थायी रूप से प्रतिबंधित क्यों न किया जाए।
यह विवाद रविवार को तब शुरू हुआ, जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कथित तौर पर ‘मौनी अमावस्या’ के दिन—जो पवित्र स्नान के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है—आरक्षित पुल संख्या दो पर लगे बैरिकेड को तोड़ते हुए घोड़ा-गाड़ी से आगे बढ़ने की कोशिश की। उस समय अत्यधिक भीड़ के कारण केवल पैदल आवाजाही की अनुमति थी, इसके बावजूद वह भीड़ के साथ आगे बढ़ गए।
प्रयागराज मेला प्राधिकरण द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि इस कृत्य से मेला पुलिस और प्रशासन को भीड़ प्रबंधन में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
नोटिस में कहा गया, “स्वामी जी के इस प्रकार प्रवेश करने से भगदड़ की आशंका पैदा हो गई थी और इससे जानमाल के गंभीर नुकसान की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।”
प्रशासन ने सवाल उठाया है कि इस घटना को देखते हुए उनके संस्थान को दी जा रही भूमि और सुविधाएं वापस क्यों न ली जाएं और उन्हें मेला क्षेत्र में प्रवेश से स्थायी रूप से प्रतिबंधित क्यों न किया जाए।
नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के मीडिया प्रभारी शैलेन्द्र योगीराज ने गुरुवार को आरोप लगाया कि सरकार द्वेषपूर्ण भावना के तहत कार्रवाई कर रही है। उन्होंने दावा किया कि नोटिस शंकराचार्य शिविर के पंडाल के पीछे चिपकाया गया था और उस पर 18 जनवरी की तारीख अंकित है, जबकि इसकी जानकारी उन्हें प्रशासन के एक कर्मचारी से मिलने के बाद ही हुई।
इससे पहले भी मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक अलग नोटिस जारी किया था, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के एक सिविल अपील में दिए गए आदेश का हवाला दिया गया था। उस आदेश में कहा गया है कि अंतिम निर्णय होने तक किसी भी धार्मिक प्रमुख को ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य के रूप में औपचारिक रूप से अभिषिक्त नहीं किया जा सकता।
पहले नोटिस में कहा गया था कि अब तक किसी भी धार्मिक नेता को ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य नियुक्त नहीं किया गया है, इसके बावजूद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 2025–26 प्रयागराज माघ मेला के दौरान अपने शिविर में लगे बोर्डों पर स्वयं को ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य प्रदर्शित किया।
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