यदि प्रज्ञानानंदा वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई करते हैं तो मुकाबला चेन्नई में भी हो सकता है: आनंद

Kolkata: India’s grandmaster Viswanathan Anand competes against compatriot grandmaster Vidit Gujrathi during a match at the Tata Steel Chess India 2026 Rapid and Blitz Open tournament, in Kolkata, Sunday, Jan. 11, 2026. (PTI Photo/Swapan Mahapatra) (PTI01_11_2026_000404B)

जयपुर, 16 जनवरी (पीटीआई) — अंतरराष्ट्रीय शतरंज महासंघ (फिडे) के उपाध्यक्ष और भारतीय शतरंज के महान खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद ने कहा है कि अगर आर. प्रज्ञानानंदा कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीतकर विश्व चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई करते हैं, तो इस साल का खिताबी मुकाबला चेन्नई में आयोजित किया जा सकता है। इस स्थिति में मौजूदा विश्व चैंपियन और उनके हमवतन डी. गुकेश के साथ मुकाबला बेहद भावनात्मक होगा।

20 वर्षीय प्रज्ञानानंदा उन आठ खिलाड़ियों में शामिल हैं जो मार्च–अप्रैल में होने वाले कैंडिडेट्स टूर्नामेंट में विश्व चैंपियन को चुनौती देने का अधिकार पाने के लिए उतरेंगे। उन्होंने 2025 में पात्र फिडे टूर्नामेंटों में शानदार प्रदर्शन के आधार पर क्वालीफाई किया है। गुकेश (19) और प्रज्ञानानंदा दोनों को विश्वनाथन आनंद ने मार्गदर्शन दिया है।

कैंडिडेट्स टूर्नामेंट में अन्य खिलाड़ियों में फैबियानो कारुआना, हिकारू नाकामुरा, अनीश गिरी, वेई यी, जावोखिर सिंदारोव, आंद्रेई एसिपेंको और मैथियास ब्लूबाउम शामिल हैं।

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में अपनी नई पुस्तक ‘लाइटनिंग किड: 64 विनिंग लेसन्स फ्रॉम द बॉय हू बिकेम फाइव-टाइम वर्ल्ड चैंपियन’ के प्रचार के दौरान आनंद ने कहा,

“जो भी कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीतेगा, वह वर्ल्ड चैंपियनशिप में बहुत खतरनाक साबित होगा। अगर प्रज्ञानानंदा क्वालीफाई करते हैं, तो यह मुकाबला दोनों के लिए भावनात्मक रूप से बेहद खास होगा।”

उन्होंने कहा, “यह सामान्य मुकाबला नहीं होगा। यह चेन्नई में भी हो सकता है। दोनों एक ही स्कूल और एक ही प्रशिक्षण प्रणाली से निकले हैं। आसपास के लोगों की भावनाएं भी काफी जुड़ी होंगी, लेकिन दोनों के लिए हालात समान होंगे।”

चेन्नई ने आखिरी बार 2013 में विश्व शतरंज चैंपियनशिप की मेजबानी की थी, जब आनंद का सामना नॉर्वे के मैग्नस कार्लसन से हुआ था। इससे पहले 2000 में दिल्ली में आनंद और स्पेन के एलेक्सी शिरोव के बीच खिताबी मुकाबला हुआ था।

आनंद ने कहा कि अगर गुकेश का मुकाबला किसी अन्य खिलाड़ी से होता, तब भी वह रोचक होता, लेकिन उसमें इतना भावनात्मक दबाव नहीं होता।

उन्होंने कहा कि अमेरिकी खिलाड़ी फैबियानो कारुआना और हिकारू नाकामुरा जैसे अनुभवी शतरंज खिलाड़ी मानसिक खेल खेलने की कोशिश कर सकते हैं, जबकि अन्य खिलाड़ियों के साथ मुकाबला अपेक्षाकृत तटस्थ होगा।

विश्व चैंपियनशिप की तारीख और आयोजन स्थल की घोषणा अभी नहीं हुई है।

खुद को अर्ध-सेवानिवृत्त बताने वाले आनंद ने कहा कि वह आज भी खेलते हैं क्योंकि उन्हें प्रतिस्पर्धा पसंद है।

उन्होंने कहा, “मैं पूरे साल लगातार टूर्नामेंट खेलने के बजाय चुनिंदा प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना पसंद करता हूं। इससे मुझे अधिक समय भी मिलता है और खेल से जुड़ाव भी बना रहता है।”

युवा खिलाड़ियों के साथ अपने संबंधों पर आनंद ने कहा कि उम्र के बड़े अंतर के बावजूद आपसी सम्मान बना हुआ है।

उन्होंने मजाक में कहा, “कई बार मुझे एहसास होता है कि मैं उनके माता-पिता से भी बड़ा हूं।”

आनंद ने यह भी स्वीकार किया कि हार उन्हें बहुत परेशान करती है।

उन्होंने कहा, “अगर मैं कई मुकाबले हार जाऊं, तो दुनिया की सबसे खूबसूरत जगह पर भी मुझे खुशी नहीं मिलती। लेकिन जीत मिल जाए, तो किसी साधारण जगह पर भी मन खुश रहता है।”

उन्होंने कहा कि हार के बाद गुस्सा आना जरूरी है, क्योंकि यही भावना एक खिलाड़ी को आगे बेहतर करने के लिए प्रेरित करती है।

अपने करियर को याद करते हुए आनंद ने बताया कि वह मुकाबले के दौरान प्रतिद्वंद्वियों से दूरी बनाए रखते थे ताकि उनकी भावनाओं को पढ़ा न जा सके।

उन्होंने कहा, “मैच खत्म होने से पहले मैं विरोधी से दोस्ताना व्यवहार नहीं कर सकता था। यह खेल की स्वाभाविक मानसिक स्थिति होती है।”

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