बैंकॉक, 2 दिसंबर (AP) कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते आकर्षण और इसकी संभावनाओं के बीच कई गंभीर चिंताएँ उभर रही हैं—खासकर यह कि यह तकनीक पहले से ही वंचित आबादी पर कितना असर डाल सकती है।
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि जब तक वैश्विक स्तर पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, एआई से होने वाले अधिकतर लाभ अमीर देशों तक ही सीमित रहेंगे, जिससे अमीर और गरीब के बीच की खाई और चौड़ी होगी।
रिपोर्ट ने मौजूदा हालात की तुलना औद्योगिक क्रांति के समय हुए “ग्रेट डाइवर्जेंस” से की है, जब पश्चिमी देशों ने तेज़ी से विकास किया और कई अन्य राष्ट्र पिछड़ गए।
आज भी दुनिया के कई हिस्से बिजली, इंटरनेट, डिजिटल कौशल और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं, और ऐसे लोग अक्सर डेटा में “अदृश्य” रह जाते हैं—जिससे वे किसी भी नीति या योजना में शामिल ही नहीं होते।
रिपोर्ट कहती है कि एआई एक बहुउद्देश्यीय तकनीक है जो खेती में बेहतर सलाह, एक्स-रे और अन्य मेडिकल जांचों का तेज़ विश्लेषण, आपदा प्रबंधन में बेहतर अनुमान और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने में मदद कर सकती है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों और आपदा-प्रभावित इलाकों को बड़ा लाभ मिल सकता है।
लेकिन विकसित देशों में भी डेटा सेंटर्स की भारी बिजली और पानी की खपत को लेकर चिंता बढ़ रही है। बढ़ती ऊर्जा मांग से कार्बन उत्सर्जन कम करने के वैश्विक प्रयास प्रभावित हो सकते हैं।
रिपोर्ट में एआई से जुड़ी नैतिकता, गोपनीयता, साइबर सुरक्षा और डीपफेक जैसे खतरों की ओर भी इशारा किया गया है।
एशिया के कई देश—चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर—एआई का अधिकतम लाभ उठाने की स्थिति में हैं। इसके विपरीत, अफगानिस्तान, मालदीव और म्यांमार जैसे देशों में बिजली, प्रशिक्षण और तकनीकी ढांचे की कमी बड़ी बाधा है।
कई विकसित देशों के भीतर भी क्षेत्रों के बीच डिजिटल असमानता मौजूद है।
यूएनडीपी रिपोर्ट कहती है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र की लगभग एक-चौथाई आबादी अब भी इंटरनेट से वंचित है। यदि यह अंतर नहीं भरा गया, तो लाखों लोग डिजिटल भुगतान, डिजिटल पहचान, ऑनलाइन शिक्षा और एआई-आधारित वैश्विक अर्थव्यवस्था के लाभों से दूर रह जाएंगे।
रिपोर्ट चेतावनी देती है कि ऐसे लोग “एआई-चालित वैश्विक अर्थव्यवस्था के गलत तरफ फँस सकते हैं।”
साथ ही, गलत सूचना, निगरानी से गोपनीयता का उल्लंघन, और पूर्वाग्रह बढ़ाने वाले एआई सिस्टम जैसे खतरे बेहद गंभीर हैं। इसलिए पारदर्शिता और प्रभावी विनियमन आवश्यक है।
रिपोर्ट सरकारों से आग्रह करती है कि वे डिजिटल बुनियादी ढांचे, शिक्षा, कौशल विकास, निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और सामाजिक सुरक्षा में अधिक निवेश करें, ताकि एआई का लाभ सभी तक पहुँच सके और जोखिमों से सबसे अधिक प्रभावित होने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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