यूएस डिफेंस विधेयक में भारत के साथ साझेदारी बढ़ाने पर जोर, क्वाड की भूमिका को भी रेखांकित किया

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न्यूयॉर्क/वॉशिंगटन, 8 दिसंबर (PTI) — अमेरिका के वार्षिक रक्षा नीति विधेयक ने भारत के साथ रक्षा सहयोग को और विस्तृत करने पर जोर दिया है। बिल में कहा गया है कि क्वाड के माध्यम से भारत के साथ बढ़ती साझेदारी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में “मुक्त और खुले माहौल” को मजबूत करेगी और चीन से उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने में मदद करेगी।

फिस्कल ईयर 2026 के लिए नेशनल डिफेंस ऑथराइजेशन एक्ट (NDAA), जिसे रविवार को कांग्रेस नेताओं ने जारी किया, में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रक्षा गठबंधनों और साझेदारियों पर कांग्रेस की मंशा को विस्तार से बताया गया है। इसके अनुसार, अमेरिकी रक्षा मंत्री को ऐसे कदम जारी रखने चाहिए जो इस क्षेत्र में अमेरिका के साझेदारों और सहयोगियों के साथ रक्षा संबंधों को मजबूत करें, ताकि चीन के साथ रणनीतिक प्रतिस्पर्धा में अमेरिका की बढ़त बरकरार रहे।

बिल में कहा गया है कि इन प्रयासों में भारत के साथ जुड़ाव बढ़ाना शामिल है — विशेष रूप से क्वाड (भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया) के माध्यम से — जिसमें द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सैन्य अभ्यासों में भागीदारी, रक्षा व्यापार का विस्तार, और मानवीय सहायता व आपदा प्रतिक्रिया में सहयोग बढ़ाना महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, समुद्री सुरक्षा पर भारत के साथ और अधिक करीबी सहयोग विकसित करने की बात भी कही गई है।

क्वाड, जिसकी स्थापना 2017 में हुई थी, इंडो-पैसिफिक में चीन के आक्रामक रुख का मुकाबला करने के उद्देश्य से काम करता है।

विधेयक में यह भी उल्लेख है कि अमेरिकी रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री को मिलकर इंडो-पैसिफिक देशों के साथ रक्षा औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने के लिए एक सुरक्षा पहल स्थापित करनी चाहिए। इस पहल का उद्देश्य सहयोगी देशों के रक्षा उत्पादन नेटवर्क को क्षमता, संसाधन, कार्यबल और सप्लाई चेन सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में मजबूत और अधिक टिकाऊ बनाना है।

इस पहल में किन देशों को शामिल किया जाएगा, यह तय करने की प्रक्रिया भी स्थापित की जाएगी। संभावित देशों में ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया, भारत, फिलीपींस और न्यूज़ीलैंड शामिल हैं।

विधेयक के एक अन्य हिस्से में ‘भारत और अमेरिका के बीच परमाणु दायित्व नियमों पर संयुक्त मूल्यांकन’ का उल्लेख है। इसमें कहा गया है कि अमेरिकी विदेश मंत्री को भारत—अमेरिका स्ट्रैटेजिक सिक्योरिटी डायलॉग के तहत एक संयुक्त परामर्श तंत्र स्थापित करना चाहिए, जो 2008 में हस्ताक्षरित दोनों देशों के बीच शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा सहयोग समझौते के कार्यान्वयन की समीक्षा करेगा।

यह तंत्र भारत के घरेलू परमाणु दायित्व नियमों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप लाने के संभावित विकल्पों पर चर्चा करेगा और भविष्य के द्विपक्षीय या बहुपक्षीय कूटनीतिक प्रयासों के लिए रणनीति तैयार करेगा। इस मूल्यांकन पर आधारित रिपोर्ट एक्ट लागू होने के 180 दिनों के भीतर और अगले पाँच वर्षों तक हर साल प्रस्तुत की जाएगी।

बिल में “मित्र या साझेदार राष्ट्र” की परिभाषा भी दी गई है, जिसमें आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) के सदस्य देश, “भारत सरकार”, और वे देश शामिल हैं जिन्हें अमेरिकी विदेश मंत्री इस श्रेणी में नामित करें।

श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़

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