नई दिल्ली, 11 जुलाई (पीटीआई) — प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी ताजा चार्जशीट में आरोप लगाया है कि यूनिटेक ग्रुप और उसके प्रमोटरों ने होमबायर्स व वित्तीय संस्थाओं से प्राप्त 16,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि में से लगभग आधा हिस्सा निजी उपयोग और विभिन्न बेनामी कंपनियों में डायवर्ट कर दिया।
मुख्य आरोप और जांच के बिंदु
चार्जशीट: तीसरी अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) 10 जुलाई को दिल्ली की विशेष मनी लॉन्ड्रिंग अदालत में दायर की गई। इसमें यूनिटेक के प्रमोटर रमेश चंद्र और उनसे जुड़ी कंपनियों को आरोपी बनाया गया है।
आरोपी: कुल 105 व्यक्ति व संस्थाएं अब तक आरोपी बनाई जा चुकी हैं। 1,291 संपत्तियां (कुल मूल्य 1,621.91 करोड़ रुपये) अटैच की गई हैं।
जांच की शुरुआत: ईडी ने जून 2018 में PMLA केस दर्ज कर यूनिटेक ग्रुप और प्रमोटरों की जांच शुरू की थी।
मूल मामला: सीबीआई और दिल्ली पुलिस द्वारा रमेश चंद्र, उनके बेटे संजय चंद्र, अजय चंद्र और बहू प्रीति चंद्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।
ईडी के अनुसार घोटाले का तरीका
धोखाधड़ी: 29,800 से अधिक होमबायर्स ने यूनिटेक की हाउसिंग परियोजनाओं में अपने जीवनभर की बचत निवेश की थी, लेकिन प्रमोटरों ने आपराधिक साजिश के तहत इन निवेशों को डायवर्ट, लेयर और लॉन्डर किया।
राशि का डायवर्जन: कुल 16,075.89 करोड़ रुपये में से 7,794.35 करोड़ रुपये गैर-प्राधिकृत कार्यों के लिए डायवर्ट किए गए।
बेनामी कंपनियां: रमेश चंद्र और उनके परिवार ने यह राशि अपनी विभिन्न बेनामी कंपनियों और व्यक्तिगत हितों में ट्रांसफर की।
अंतरराष्ट्रीय मनी लॉन्ड्रिंग: डायवर्ट की गई राशि को UAE भेजा गया, फिर UAE, केमैन आइलैंड्स और सिंगापुर के जरिए वापस भारत लाया गया। इसके लिए कई बेनामी और शेल कंपनियों का इस्तेमाल हुआ।
ट्रिकार ग्रुप: चंद्रा परिवार ने मनी लॉन्ड्रिंग के लिए ट्रिकार ग्रुप ऑफ कंपनीज बनाई।
विदेशी संपत्तियां: प्रीति चंद्रा ने इन फंड्स से दुबई में तीन फ्लैट खरीदे।
वित्तीय हेरफेर: कंपनियों के शेयर वास्तविक मूल्य से कहीं अधिक दाम पर खरीदे गए और यह राशि अन्य कंपनियों में ट्रांसफर की गई।
होमबायर्स को नुकसान
घर नहीं मिले: होमबायर्स को निर्धारित समयसीमा के बाद भी घर नहीं दिए गए और उन्हें अंधेरे में रखा गया।
निवेश का दुरुपयोग: वेंचर कैपिटल फंड्स का भी दुरुपयोग कर प्रमोटरों ने निजी हित साधे।
निष्कर्ष
यह मामला देश के सबसे बड़े रियल एस्टेट घोटालों में से एक बन गया है, जिसमें हजारों होमबायर्स की गाढ़ी कमाई का दुरुपयोग हुआ। ईडी की जांच और कानूनी कार्रवाई जारी है, और अब तक बड़ी संख्या में संपत्तियां जब्त की जा चुकी हैं।
श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़
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