
मुजफ्फरनगर (यूपी) 9 जनवरी (पीटीआई) एक व्यक्ति की हत्या के मामले में फास्ट ट्रैक अदालत ने सबूतों के अभाव में 21 साल बाद शुक्रवार को दो आरोपियों को बरी कर दिया।
बचाव पक्ष के वकील अनिल जिंदल ने कहा कि फास्ट ट्रैक अदालत की न्यायाधीश कमला पति ने राजीव और जितेंद्र को यह कहते हुए बरी कर दिया कि अभियोजन पक्ष उचित संदेह से परे आरोपों को साबित करने में विफल रहा है।
सरकारी वकील अरुण शर्मा ने विकास की पुष्टि की।
जिंदल ने पीटीआई-भाषा को बताया कि मुकदमे के लंबित रहने के दौरान शिकायतकर्ता ओमबीरी, मृतक की मां और एक आरोपी शोभा राम की मौत हो गई थी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, सुशील की 15 दिसंबर, 2004 को कथित तौर पर एक पुरानी दुश्मनी के कारण गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जब वह जिले के भोरा कलां इलाके के एक गांव में घर लौट रहा था।
ओमबीरी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत पर मामला दर्ज किया गया, जिसके बाद आरोपियों पर मुकदमा चलाया गया। पीटीआई सी. ओ. आर. सी. डी. एन. एसएचएस
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