यूपी सीएम और उपमुख्यमंत्री ने कवि रामधारी सिंह ‘डिंकर’ की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की

Ramdhari Singh 'Dinkar'

लखनऊ, 23 सितंबर (PTI) – उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनके उपमुख्यमंत्री मंगलवार को महान हिंदी कवि और ‘राष्ट्रकवि’ रामधारी सिंह ‘डिंकर’ की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की, उनके साहित्य में योगदान और देशभक्ति की प्रेरक बातें याद करते हुए।

मुख्यमंत्री ने X (पूर्व ट्विटर) पर डिंकर के एक काव्यांश का उद्धरण किया,

“वह दीप जो देख रहा है झिलमिल, दूर नहीं है, ठक्कर बैठ गए क्या भाई! मंज़िल दूर नहीं है।”

श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए आदित्यनाथ ने डिंकर को “महान साहित्यकार, संस्कृति के चौकस रक्षक और राष्ट्र की आत्मा की प्रबल आवाज़” बताया। उन्होंने कहा कि डिंकर की अमर रचनाएँ “क्रांति की गूँज, किसानों का दर्द और रणभूमि की वीरता” को दर्शाती हैं और उनकी रचनाएँ आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति, साहस और न्याय के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती रहेंगी।

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी डिंकर के एक काव्यांश का उल्लेख किया –

“कर्मभूमि पर चलो निरंतर, ठहरना यहाँ निषेध है, जीवन की हर राह कठिन है, संघर्षों का ही गह है।”

उन्होंने कहा, “उनकी प्रखर आवाज़ और भावपूर्ण रचनाएँ आज भी पीढ़ियों को कर्तव्य, साहस और देशप्रेम की ओर प्रेरित करती हैं।”

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने X पर डिंकर को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें ‘राष्ट्रकवि’ बताया, जिनके शब्दों ने देश की आत्मा को अभिव्यक्ति दी।

रामधारी सिंह ‘डिंकर’ (1908-1974) आधुनिक हिंदी साहित्य के सबसे प्रतिष्ठित कवियों में से एक थे। उनकी रचनाएँ जैसे “रश्मिरथी” और “कुरुक्षेत्र” देशभक्ति, सामाजिक चेतना और ऐतिहासिक विषयों का अद्भुत मिश्रण हैं।

राज्यसभा सांसद भी रहे, उन्हें पद्म भूषण और ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। हिंदी कविता में उनकी सोच और राष्ट्रवादी दृष्टिकोण आज भी प्रेरणास्त्रोत माने जाते हैं।

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