मॉस्को, 28 दिसंबर (पीटीआई) रूस ने स्पष्ट किया है कि उसका यूरोप में किसी पर भी हमला करने का कोई इरादा नहीं है, लेकिन यदि उस पर कोई हमला किया गया तो उसकी प्रतिक्रिया विनाशकारी होगी। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने रविवार को यह चेतावनी दी और कहा कि यूरोपीय संघ का तथाकथित “युद्ध पक्ष” यूक्रेन में शांति प्रयासों के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बन गया है।
लावरोव की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फ्लोरिडा स्थित उनके मार-ए-लागो आवास पर मुलाकात करने वाले हैं।
सरकारी समाचार एजेंसी तास (TASS) को दिए साक्षात्कार में लावरोव ने कहा, “यूरोपीय राजनेताओं के लिए मेरा संदेश, जिन्हें इस सच्चाई को समझने में कठिनाई हो रही है, यह है कि मैं एक बार फिर दोहराना चाहता हूं—रूस द्वारा किसी पर हमला किए जाने से डरने की कोई जरूरत नहीं है।”
उन्होंने आगे कहा, “लेकिन अगर कोई रूस पर हमला करने की सोचता है, तो उसे विनाशकारी प्रहार का सामना करना पड़ेगा।”
जेलेंस्की की ट्रंप से होने वाली मुलाकात और उनके शांति प्रस्ताव के संदर्भ में—जिसे प्रमुख यूरोपीय शक्तियों का समर्थन प्राप्त है और जिनके बारे में मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि वे कीव के लिए सुरक्षा गारंटी के तहत यूरोपीय सैनिकों की तैनाती पर जोर दे रही हैं—लावरोव ने चेतावनी दी कि ऐसे सैनिक रूस के लिए ‘वैध लक्ष्य’ होंगे।
उन्होंने कहा, “यह कहना मुश्किल है कि (ईयू प्रमुख) उर्सुला वॉन डेर लेयेन, (जर्मन चांसलर) फ्रेडरिक मर्ज़, (ब्रिटिश प्रधानमंत्री) कीर स्टारमर और (फ्रांस के राष्ट्रपति) इमैनुएल मैक्रों जैसे नेता अब ‘पॉइंट ऑफ नो रिटर्न’ तक पहुंच चुके हैं या नहीं।”
लावरोव ने कहा, “हम देख रहे हैं कि अब तक यूरोपीय युद्ध पक्ष रूस को रणनीतिक रूप से पराजित करने के लिए अपनी राजनीतिक पूंजी झोंक चुका है और किसी भी हद तक जाने को तैयार है।”
उन्होंने जोर देकर कहा, “मैं विशेष रूप से यह रेखांकित करना चाहता हूं कि उनकी ओर से उठाए गए ये कदम पूरी तरह अवैध हैं। आखिरकार, रूस ने कभी भी अपने यूरोपीय पड़ोसियों के खिलाफ शत्रुतापूर्ण कार्रवाई की पहल नहीं की।”
रूसी विदेश मंत्री ने कहा कि रूस, राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी टीम द्वारा शांति समाधान के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करता है। उन्होंने कहा कि मॉस्को अमेरिकी वार्ताकारों के साथ मिलकर संघर्ष की जड़ वजहों को संबोधित करने वाले टिकाऊ समझौते तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है।
लावरोव के अनुसार, ट्रंप के सत्ता में आने के बाद यूरोप और यूरोपीय संघ शांति के सबसे बड़े रोड़े के रूप में उभरे हैं। उन्होंने कहा, “वे इस बात को छिपा नहीं रहे हैं कि वे रूस के साथ सीधे युद्ध के लिए तैयार हो रहे हैं।”
एक अन्य रिपोर्ट में, तास ने लावरोव के हवाले से कहा कि यदि ताइवान को लेकर तनाव बढ़ता है तो रूस पूरी तरह से बीजिंग का समर्थन करेगा, क्योंकि पश्चिम ताइवान को चीन के खिलाफ सैन्य-रणनीतिक प्रतिरोध के एक औजार के रूप में देखता है।
लावरोव ने कहा, “ताइवान जलडमरूमध्य में संभावित तनाव की स्थिति में कार्रवाई की प्रक्रिया 16 जुलाई 2001 को चीन जनवादी गणराज्य के साथ हुए ‘सद्भावना और मैत्री सहयोग संधि’ में निर्धारित है।”
उन्होंने बताया, “उस दस्तावेज़ के मूल सिद्धांतों में राष्ट्रीय एकता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा में पारस्परिक समर्थन शामिल है।”
लावरोव ने यह भी कहा, “वर्तमान में ताइवान को चीन के खिलाफ सैन्य-रणनीतिक प्रतिरोध के एक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। यह स्वार्थी हितों का भी मामला है—पश्चिम के कुछ देश ताइवानी धन और तकनीक से लाभ कमाने के इच्छुक हैं।”
पी एनपीके
श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़
एसईओ टैग: #swadesi, #News

