रमेश ने धिरौली कोयला खदान परियोजना पर पर्यावरण मंत्रालय को घेरा

Fertile farmland and forests could be converted to a scene like this if Adani's proposed Dhirauli coal mine proceeds. [Image - Adani watch]

नई दिल्ली, 17 सितम्बर (पीटीआई) कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने बुधवार को अडानी समूह की धिरौली कोयला खनन परियोजना की मंजूरी प्रक्रिया में “खुली अनियमितताओं” के अपने आरोपों को दोहराया और दावा किया कि यह परियोजना संविधान की पाँचवीं अनुसूची के अंतर्गत संरक्षित क्षेत्र में आती है। उन्होंने इसके समर्थन में 2023 में लोकसभा में कोयला मंत्रालय के दिए गए जवाब का हवाला दिया।

रमेश ने आरोप लगाया कि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) का यह कहना कि खनन भूमि पाँचवीं अनुसूची क्षेत्र में नहीं आती, “गलत” है।

उन्होंने कहा, “9 अगस्त 2023 को तत्कालीन कोयला मंत्री ने लोकसभा में साफ-साफ कहा था कि धिरौली कोयला खनन परियोजना संविधान की पाँचवीं अनुसूची के तहत संरक्षित क्षेत्र में आती है।”

रमेश ने यह भी कहा कि वन अधिकार अधिनियम, 2006 (FRA) के अंतर्गत न सिर्फ व्यक्तिगत अधिकार, बल्कि सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (CFR) और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) के आवासीय अधिकार भी शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि धिरौली कोयला खदान के लिए करीब 3,500 एकड़ वनभूमि का विचलन पाँच गाँवों में होगा, और कम से कम तीन अन्य गाँव इन वनों पर निर्भर हैं।

कांग्रेस नेता ने कहा कि अब तक जिले में किसी भी गाँव के सामुदायिक अधिकार और आवासीय अधिकार मान्यता प्राप्त नहीं हुए हैं।

पिछले हफ्ते रमेश ने आरोप लगाया था कि अडानी समूह ने मध्य प्रदेश के धिरौली में बिना आवश्यक अनुमति पेड़ों की कटाई शुरू कर दी है, जिसे राज्य सरकार ने “बेसलेस” बताया।

राज्य सरकार और पर्यावरण मंत्रालय दोनों ने कहा है कि परियोजना को सभी आवश्यक मंजूरियाँ मिल चुकी हैं और ग्रामसभा की सहमति के साथ सार्वजनिक सुनवाई भी पूरी हो चुकी है।

इस महीने की शुरुआत में अडानी पावर ने कहा था कि उसे कोयला मंत्रालय से सिंगरौली जिले की धिरौली खदान में खनन शुरू करने की अनुमति मिल गई है।

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