
अहमदाबाद/राजकोट, 16 जून (पीटीआई) — एयर इंडिया विमान हादसे में जान गंवाने वाले गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी का सोमवार रात राजकोट में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। गृह मंत्री अमित शाह सहित कई राजनीतिक नेताओं ने अंतिम संस्कार से पहले उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
हादसे के चार दिन बाद अहमदाबाद से उनके पार्थिव शरीर को विशेष विमान से उनके गृहनगर लाया गया। पूरे शव यात्रा मार्ग पर हजारों लोगों ने अंतिम विदाई दी। शव यात्रा फूलों से सजी गाड़ी में कई किलोमीटर तक चली, जिसमें लोग सड़कों के दोनों ओर खड़े होकर भावुक होकर नारे लगाते दिखे।
राजकोट के श्मशान घाट पर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया और उन्हें 21 तोपों की सलामी दी गई।
गुजरात सरकार ने सोमवार को दिवंगत मुख्यमंत्री की स्मृति में एक दिन का राजकीय शोक घोषित किया था।
अमित शाह के अलावा केंद्रीय जल शक्ति मंत्री, गुजरात भाजपा अध्यक्ष सीआर पाटिल, राज्यपाल आचार्य देवव्रत, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, भाजपा के वरिष्ठ नेता बी.एल. संतोष, अन्य सांसद, विधायक, सामाजिक व धार्मिक संगठन के लोग भी श्रद्धांजलि देने उपस्थित थे।
शव यात्रा राजकोट के ग्रीनलैंड क्रॉसरोड से शुरू होकर उनके निवास स्थान और फिर श्मशान घाट तक पहुंची। इस दौरान समर्थकों ने “विजयभाई तुम अमर हो” के नारे लगाए और फूलों की वर्षा की।
इससे पहले दिन में अहमदाबाद सिविल अस्पताल में डीएनए मिलान के बाद उनके शव की पहचान की गई और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की उपस्थिति में परिजनों को पार्थिव शरीर सौंपा गया।
पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी (68) एयर इंडिया की लंदन जा रही फ्लाइट AI-171 में सवार थे, जो 12 जून को अहमदाबाद में दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। विमान में 242 लोग सवार थे, जिनमें से केवल एक यात्री बच पाया। हादसे में जमीन पर मौजूद 29 लोगों की भी जान गई, जिनमें पांच एमबीबीएस छात्र थे।
रूपाणी को शांत स्वभाव और दृढ़ प्रशासनिक नेतृत्व के लिए जाना जाता था। अगस्त 2016 से सितंबर 2021 तक वह गुजरात के मुख्यमंत्री रहे और कोविड-19 के बाद राज्य को पुनर्जीवित करने में अहम भूमिका निभाई।
वह छात्र जीवन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े और 1975 में आपातकाल के विरोध में जेल गए। उन्होंने 1987 में राजकोट नगर निगम से पार्षद बनकर राजनीति में प्रवेश किया और बाद में महापौर बने। वे 2006 से 2012 तक राज्यसभा सांसद भी रहे।
मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने औद्योगिक नीति 2020 और आदिवासी विकास योजनाएं शुरू कीं। 2021 में चुनावों से पहले उन्होंने मुख्यमंत्री पद छोड़ा और पंजाब भाजपा प्रभारी बनाए गए।
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