राज्य द्वारा हेलीपैड अधिग्रहण के खिलाफ एविएशन कंपनी की याचिका पर शीघ्र निर्णय करे उत्तराखंड हाईकोर्ट: सुप्रीम कोर्ट

New Delhi: A view of Supreme Court of India, in New Delhi, Tuesday, Dec. 16, 2025. (PTI Photo/Shahbaz Khan)(PTI12_16_2025_000044B)

नई दिल्ली, 18 फरवरी (PTI) सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उत्तराखंड हाईकोर्ट से कहा कि वह राज्य सरकार द्वारा गोविंद घाट स्थित निजी हेलीपैड के बार-बार अस्थायी अधिग्रहण के खिलाफ एविएशन कंपनी डेक्कन चार्टर्स प्राइवेट लिमिटेड की दो अलग-अलग याचिकाओं पर शीघ्र निर्णय ले।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने नैनीताल स्थित राज्य उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया कि वे मुख्य न्यायाधीश से निर्देश प्राप्त कर एविएशन कंपनी की लंबित दोनों याचिकाओं को 9 मार्च 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में एक पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करें।

पीठ ने यह भी कहा कि जो पीठ इन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी, वह दो महीने के भीतर इनका निस्तारण करे।

राज्य में आगामी चारधाम यात्रा को ध्यान में रखते हुए पीठ ने कहा कि यदि निर्धारित समयावधि में याचिकाओं पर निर्णय नहीं होता है तो एविएशन कंपनी शीर्ष अदालत का रुख कर यहां याचिका को पुनर्जीवित करने की मांग कर सकती है।

डेक्कन चार्टर्स प्राइवेट लिमिटेड ने अपने वकील स्मरहर सिंह के माध्यम से दायर याचिका में राज्य सरकार द्वारा उसके निजी हेलीपैड के बार-बार अधिग्रहण को “अवैध, निरंतर और असंवैधानिक” बताया है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार ने प्रक्रिया का पालन किए बिना कार्यशील हेलीपैड को प्रतिस्पर्धी कंपनी पवन हंस लिमिटेड को सौंप दिया, जबकि उच्च न्यायालय ने कई तात्कालिक अर्जियों के बावजूद मामले पर निर्णय नहीं दिया। डेक्कन चार्टर्स 2011 से श्री हेमकुंड साहिब जी यात्रा के लिए हेलीकॉप्टर शटल सेवा संचालित कर रही है।

कंपनी के पास चमोली जिले के गोविंद घाट हेलीपैड का मार्च 2027 तक वैध पट्टा है। हालांकि कंपनी का आरोप है कि मई 2024 से राज्य प्रशासन यात्रा सीजन के नाम पर “अस्थायी अधिग्रहण” के बहाने जबरन कब्जे की कार्रवाई कर रहा है।

याचिका के अनुसार, हेलीपैड का पहला अधिग्रहण 23 मई 2024 को किया गया था, जिसे कंपनी ने 2024 में उच्च न्यायालय में चुनौती दी।

दूसरा अधिग्रहण 27 जून 2025 को किया गया। पहली याचिका लंबित रहने के दौरान ही राज्य ने छह माह के लिए दूसरा अधिग्रहण आदेश जारी कर दिया।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि राज्य ने हेलीपैड के “ताले तोड़कर” डेक्कन द्वारा निर्मित और अनुरक्षित इस सुविधा को व्यावसायिक संचालन के लिए पवन हंस लिमिटेड को सौंप दिया।

कंपनी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 में निर्धारित अनिवार्य प्रक्रियाओं का पालन किए बिना “एमिनेंट डोमेन” की शक्ति का दुरुपयोग किया।

याचिका में 23 मई 2024 और 27 जून 2025 के अधिग्रहण आदेशों को निरस्त करने की मांग की गई है।

साथ ही राज्य सरकार को हेलीपैड का कब्जा कंपनी को वापस सौंपने का निर्देश देने की भी मांग की गई है।

कंपनी ने “अवैध अधिग्रहण” की अवधि के दौरान पवन हंस द्वारा किए गए प्रत्येक लैंडिंग पर 5,000 रुपये की दर से हुए नुकसान का मुआवजा देने की भी मांग की है।

मई में शुरू होने वाली 2026 की चारधाम यात्रा से पहले एविएशन कंपनी ने प्रशासनिक मनमानी के इस कथित दोहराए जा रहे क्रम को रोकने के लिए त्वरित हस्तक्षेप की मांग की है।

याचिका पर संज्ञान लेते हुए शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय को मामले का शीघ्र निपटारा करने का निर्देश दिया।

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