
रांची, 12 फरवरी (पीटीआई) झारखंड के विभिन्न हिस्सों में गुरुवार को ‘भारत बंद’ के दौरान विभिन्न ट्रेड यूनियनों के सदस्यों ने चार नए श्रम संहिताओं के विरोध में प्रदर्शन किए, हालांकि सामान्य जनजीवन पर इसका खास असर नहीं पड़ा।
10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच द्वारा बुलाए गए देशव्यापी आम हड़ताल के तहत प्रदर्शनकारियों ने विभिन्न कोयला कंपनियों और सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) के गेट पर धरना-प्रदर्शन किया।
हालांकि, बाजार और व्यावसायिक प्रतिष्ठान खुले रहे तथा वाहन सामान्य रूप से चलते रहे।
बैंक ऑफ इंडिया (बीओआई) कर्मचारी यूनियन के राज्य उप महासचिव उमेश दास ने कहा कि हड़ताल से बैंकिंग, बीमा और कोयला क्षेत्र प्रभावित हुए हैं।
इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (INTUC) के राष्ट्रीय सचिव और राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर यूनियन के महासचिव ए. के. झा ने दावा किया कि हड़ताल के कारण झारखंड में कोयला उत्पादन और आपूर्ति प्रभावित हुई है।
वाम दलों और कांग्रेस ने भी इस हड़ताल को समर्थन दिया है।
राज्य कांग्रेस के महासचिव राकेश सिन्हा ने कहा, “नई श्रम संहिताओं ने नौकरी की सुरक्षा कम कर दी है, कानूनी सुरक्षा उपायों को कमजोर किया है और नियोक्ताओं को भर्ती में अधिक स्वतंत्रता दी है, जिससे श्रमिकों के अधिकार और हित प्रभावित हुए हैं।”
सीपीआई(एमएल) लिबरेशन के सदस्यों ने हड़ताल के तहत रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर जुलूस निकाला और प्रदर्शन किया।
सीपीआई(एमएल) लिबरेशन के राज्य सचिव मनोज भक्त ने आरोप लगाया कि चारों श्रम संहिताएं “कामगार वर्ग के अधिकारों पर सीधा हमला” हैं।
उन्होंने दावा किया, “ये कानून श्रमिकों को कॉरपोरेट घरानों और पूंजीपतियों के हाथों असहाय बनाने की साजिश हैं। इन श्रम संहिताओं का असली उद्देश्य स्थायी रोजगार खत्म करना, ठेका प्रणाली को बढ़ावा देना और काम के घंटे बढ़ाना है।”
ट्रेड यूनियनों की मांगों में चारों श्रम संहिताओं और नियमों को वापस लेना, मसौदा बीज विधेयक, बिजली संशोधन विधेयक तथा ‘सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (SHANTI) अधिनियम’ को वापस लेना शामिल है।
यूनियनें मनरेगा की बहाली और वीबी-जी राम जी अधिनियम को रद्द करने की भी मांग कर रही हैं। PTI SAN SOM SAN RBT
