राष्ट्र की एकता और अखंडता का सम्मान युवाओं के कृत्यों का मार्गदर्शन करे: उपराष्ट्रपति

**EDS: THIRD PARTY IMAGE** In this image posted on Dec. 25, 2025, Vice President CP Radhakrishnan addresses during the Good Governance Day celebrations on the birth anniversary of former prime minister Atal Bihari Vajpayee, in New Delhi. (@VPIndia/X via PTI Photo)(PTI12_25_2025_000501B) *** Local Caption ***

तिरुवनंतपुरम, 30 दिसंबर (PTI) – उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने मंगलवार को युवाओं को संवैधानिक कर्तव्यों के पालन की आवश्यकता की याद दिलाई और कहा कि देश की विविधता के प्रति सम्मान और उसकी एकता और अखंडता के प्रति प्रतिबद्धता उनके कृत्यों का मार्गदर्शन करना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत के युवा भविष्य की प्रतीक्षा नहीं कर रहे—they are the future. उनके सपनों में विकसित भारत का खाका निहित है।

उन्होंने आगे कहा कि जब युवा सरलता के बजाय उत्कृष्टता, स्वार्थ के बजाय सेवा, और संकुचित हितों के बजाय राष्ट्र को प्राथमिकता देते हैं, तभी भारत उन्नति करता है। यह संदेश उन्होंने मार इवानिओस कॉलेज में प्लेटिनम जुबली समारोह का उद्घाटन करते हुए दिया।

राधाकृष्णन ने शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा हर व्यक्ति के लिए आवश्यक है, और वर्तमान पीढ़ी जो अवसर प्राप्त कर रही है, वह उनके पूर्ववर्तियों को नहीं मिला।

उपराष्ट्रपति ने युवाओं से कहा, “हमारा संविधान हमें अधिकार देता है, लेकिन समान रूप से हमारे मौलिक कर्तव्यों की भी याद दिलाता है—विविधता का सम्मान, वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा, और भारत की एकता और अखंडता के प्रति प्रतिबद्धता। ये कर्तव्य जीवंत लोकतंत्र के नागरिकों के रूप में आपके कार्यों का मार्गदर्शन करें।”

राधाकृष्णन ने कहा कि हृदय में साहस, मस्तिष्क में जिज्ञासा और कार्यों में करुणा के साथ युवा भारतीय चुनौतियों को अवसरों में बदलने की शक्ति रखते हैं।

उन्होंने यह भी कहा, “एक विकसित भारत केवल सत्ता के गलियारों में नहीं बनेगा, बल्कि कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, खेतों, कारखानों, स्टार्टअप्स और गांवों में—युवाओं के हाथों और उनकी भावना से बनेगा।”

उपराष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्र की पुकार स्पष्ट है—बड़े सपने देखें, अथक परिश्रम करें और निस्वार्थ नेतृत्व करें।

राधाकृष्णन ने मार इवानिओस कॉलेज जैसी संस्थाओं की सराहना की, जो समाज में बौद्धिक रूप से सक्षम और नैतिक रूप से स्थिर व्यक्तियों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने संस्थान की मूल्य-आधारित शिक्षा के प्रति सतत प्रतिबद्धता की भी प्रशंसा की।

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